उज्जैन झालावाड़ रेल प्रोजेक्ट: पहला सर्वे फेल, दूसरे में बदल रहा रूट, अभी और करना होगा इंतजार

आगर-मालवा से उज्जैन रेल सेवा का इंतजार एक बार फिर लंबा हो गया है. 1932 में शुरू हुई रेल लाइन आपातकाल में बंद होने के बाद अब तक बहाल नहीं हो सकी है.

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Agar Malwa-Ujjain Railway Project: आगर-मालवा और उज्जैन के बीच रेल सेवा का सपना एक बार फिर अधूरा ही नजर आ रहा है. करीब नौ दशक पहले वर्ष 1932 में शुरू हुई यह रेल सेवा आपातकाल के दौरान बंद कर दी गई थी. तब से लेकर आज तक आगर जिले के लोग लगातार रेल लाइन की बहाली की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन 2026 में भी यह मांग पटरी पर आती नहीं दिख रही. हाल ही में रेल सर्वे की हलचल ने जरूर उम्मीद जगाई थी, लेकिन पहला सर्वे फेल होने और दूसरे सर्वे में रूट बदलने की बात सामने आने के बाद लोगों को एक बार फिर लंबा इंतजार करने के संकेत मिल रहे हैं.

आपातकाल के बाद बंद हुई रेल 

आगर से उज्जैन के बीच रेल सेवा बंद होने के बाद से ही जिले के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया. हर चुनाव में यह मांग दोहराई जाती रही, लेकिन ठोस नतीजा कभी सामने नहीं आया. लोगों का कहना है कि रेल लाइन के अभाव में आगर क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे रह गया.

उज्जैन-झालावाड़ रेल लाइन की पुरानी मांग

उज्जैन से झालावाड़ तक रेल लाइन की मांग भी लंबे समय से की जा रही है. इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र से चुने गए सांसदों ने संसद में भी आवाज उठाई. उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया इस विषय पर कई बार संसद में बोल चुके हैं. कुछ समय पहले जब रेल सर्वे के लिए बजट आवंटन की खबर आई, तो इलाके में खुशी का माहौल बन गया था.

सर्वे की सुगबुगाहट, लेकिन जानकारी रही अधूरी

बजट की घोषणा के बाद रेल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्र में सर्वे करते हुए नजर आए. अलग-अलग स्तर पर कई तरह की जानकारियां सामने आती रहीं, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया. रेल को लेकर जागरूक नागरिक लगातार जानकारी जुटाने की कोशिश करते रहे, मगर स्थिति साफ नहीं हो पाई.

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पहला सर्वे तकनीकी कारणों से असफल

रविवार को आगर आए क्षेत्रीय सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उज्जैन-झालावाड़ रेल लाइन का पहला सर्वे तकनीकी कारणों से असफल हो गया है. जब उनसे असफलता के कारण पूछे गए, तो उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए विस्तार से बताने से इंकार कर दिया. इस जानकारी के बाद क्षेत्रवासियों में निराशा साफ देखी गई.

दूसरा सर्वे शुरू, रूट में बदलाव

सांसद सोलंकी ने बताया कि पहला सर्वे फेल होने के बाद अब दूसरा सर्वे शुरू कर दिया गया है. इस बार रेल लाइन को आगर तक लाने के लिए रूट में बदलाव किया गया है. नया सर्वे पिपलोन होते हुए प्रस्तावित किया गया है और इस पर काम प्रगति पर है. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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सरकार से लगातार संपर्क का दावा

सांसद ने दावा किया कि वे खुद और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस परियोजना को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी इस विषय पर सीधे बातचीत हो चुकी है. उनका कहना है कि सरकार की कोशिश है कि इसी साल आगर-मालवा को रेल से जुड़ी कोई बड़ी उपलब्धि मिले.

विकास और रोजगार से जुड़ा है रेल प्रोजेक्ट

यह प्रस्तावित रेल लाइन मध्यप्रदेश और राजस्थान को सीधे जोड़ने वाली मानी जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि रेल के अभाव में क्षेत्र में उद्योग और रोजगार के अवसर सीमित रह गए हैं. रेल लाइन आने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा.  

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