Agar Malwa Theft Case: मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले में पदस्थ नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर सुर्खियों में हैं. पहले बगुलामुखी मंदिर से अपनी चप्पल चोरी की एफआईआर दर्ज कराने को लेकर चर्चा में आए चंद्रवंशी अब जिले में चोरी के मामलों में एफआईआर दर्ज न किए जाने के मुद्दे पर मुखर हो गए हैं. कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान सामने आए एक शिकायत मामले के बाद उन्होंने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई और गृह विभाग के सचिव को चिट्ठी लिखकर पूरे मामले की शिकायत की है. यह चिट्ठी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही है.
जनसुनवाई में सामने आया मोटरसाइकिल चोरी का मामला
मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक व्यक्ति अपनी मोटरसाइकिल चोरी की शिकायत लेकर पहुंचा. उसने बताया कि उसकी बाइक चोरी हो गई थी, लेकिन आगर मालवा कोतवाली थाना पुलिस ने उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की. आवेदन देने के बावजूद पुलिस ने कथित तौर पर उसका आवेदन फाड़कर फेंक दिया, जिससे मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा.
एफआईआर न होने से बीमा क्लेम भी अटका
नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी ने बताया कि एफआईआर दर्ज न होने के कारण आवेदक को वाहन बीमा का लाभ भी नहीं मिल पाया. चोरी के बाद बीमा क्लेम के लिए एफआईआर अनिवार्य होती है, लेकिन समय पर रिपोर्ट दर्ज न होने से आवेदक को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. बाद में जब एफआईआर दर्ज हुई और बीमा से जुड़े दस्तावेज कर कार्यालय पहुंचे, तो उनका आवेदन डस्टबिन में फेंक दिए जाने का आरोप भी सामने आया.
पुलिस थाने कचरा डालने की जगह नहीं: चंद्रवंशी
इस मामले पर नाराजगी जताते हुए नायब तहसीलदार चंद्रवंशी ने कहा कि पुलिस थाने इसलिए नहीं होते कि आम नागरिकों के आवेदन कचरे के डिब्बे में डाल दिए जाएं. उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है. नलखेड़ा थाना क्षेत्र में बगुलामुखी मंदिर में लगातार चैन स्नेचिंग की घटनाएं हुई हैं, जिनमें करीब 12 लाख रुपये की चोरी हुई, लेकिन वहां भी रिपोर्ट दर्ज नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं.
गृह विभाग के सचिव को लिखा प्रतिवेदन
चंद्रवंशी ने बताया कि उन्होंने 6 अप्रैल को चोरी के मामलों में एफआईआर दर्ज न होने को लेकर गृह विभाग के सचिव को चार पेज का विस्तृत प्रतिवेदन भेजा है. इस प्रतिवेदन के साथ पीड़ितों के आवेदन और चोरी से जुड़े प्रमाण भी संलग्न किए गए हैं. इसमें पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई है.
कार्रवाई नहीं हुई तो फिर लिखेंगे पत्र
नायब तहसीलदार ने कहा कि अभी तक इस प्रतिवेदन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. जिले के मौजूदा एसपी का तबादला हो चुका है, ऐसे में नए एसपी से चर्चा कर कार्रवाई का आग्रह किया जाएगा. यदि फिर भी सुधार नहीं हुआ, तो वे दोबारा गृह विभाग को पत्र लिखकर पूरे हालात से अवगत कराएंगे. इस पूरे विवाद ने एक बार फिर जिले में पुलिस की कार्यशैली और आम नागरिकों की सुनवाई के सवाल को केंद्र में ला दिया है.
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