100 साल पुराना वो अखबार, जिसके संपादक थे महात्मा गांधी, गाडरवारा के पुस्तकालय में आज भी है सुरक्षित

मध्‍य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के श्री सार्वजन‍िक पुस्‍तकालय, त‍िलक भवन गाडरवारा का 111 साल पुराना पुस्तकालय आज भी महात्मा गांधी द्वारा संपादित “हिंदी नवजीवन” समेत कई दुर्लभ अखबारों और पुस्तकों को सहेजे हुए है. यही वह स्थान है जहां दार्शनिक ओशो ने सैकड़ों पुस्तकें पढ़ीं. यह पुस्तकालय आजादी-पूर्व पत्रकारिता और विचारधारा की जीवित विरासत है.

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Newspaper Edited by Mahatma Gandhi: सौ साल पुराना वह अखबार, जिसका संपादन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था, आज भी सुरक्षित है. “हिंदी नवजीवन” का यह मूल अंक 7 जनवरी 1926 को प्रकाशित हुआ था. इस ऐतिहासिक अंक सहित कई दुर्लभ अखबार मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा स्थित श्री सार्वजन‍िक पुस्‍तकालय, त‍िलक भवन में बेहद सहेजकर रखे गए हैं.

यह वही पुस्तकालय है, जहां विश्वविख्यात दार्शनिक रजनीश ओशो ने बैठकर अध्ययन किया था. यह अखबार आजादी से पहले की पत्रकारिता की उस परंपरा को दर्शाता है, जब शब्दों का चयन, भाषा की मर्यादा और विचारों की जिम्मेदारी सबसे ऊपर मानी जाती थी.

वो पुस्तकालय, जहां ओशो ने सैकड़ों पुस्तकें पढ़ीं

गाडरवारा पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1914 में बाल गंगाधर तिलक के आह्वान पर हुई थी. आज भी यह पुस्तकालय पीढ़ियों से ज्ञान का केंद्र बना हुआ है. डिजिटल युग के बावजूद यहां रोज दर्जनों पाठक आते हैं और करीब 10 हजार पुस्तकों का अध्ययन करते हैं. 

श्री सार्वजन‍िक पुस्‍तकालय, त‍िलक भवन गाडरवारा, नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

आजादी की अलख जगाने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह पुस्तकालय आज भी कई दुर्लभ अखबारों और पुस्तकों को सहेजकर रखे हुए है. महात्मा गांधी के “हिंदी नवजीवन” से लेकर मदन मोहन मालवीय की पत्रिका “सनातन धर्म” की मूल प्रतियां यहां मौजूद हैं.

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ओशो की पढ़ी और हस्ताक्षरित पुस्तकें

महान दार्शनिक ओशो का जन्म भले ही रायसेन जिले के कुपवाड़ा में हुआ हो, लेकिन उनका बचपन गाडरवारा में बीता. यहीं उन्होंने स्कूली शिक्षा ग्रहण की और इसी पुस्तकालय में बैठकर सैकड़ों किताबें पढ़ीं.

पुस्तकालय के रजिस्टर में आज भी ओशो द्वारा इश्यू कराई गई पुस्तकों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है. कई पुस्तकों पर उनके हस्ताक्षर भी हैं. इन पुस्तकों को बेहद सावधानी से संजोया गया है, जिन्हें देखने और महसूस करने देश-विदेश से ओशो के अनुयायी यहां पहुंचते हैं. 

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Newspaper Edited by Mahatma Gandhi

पत्रकारिता की विरासत संभाले हुए है यह पुस्तकालय

समय के साथ पत्रकारिता बदली, लेकिन आजादी से पहले की पत्रकारिता कैसी थी, यह यहां रखे ऐतिहासिक अखबारों से महसूस किया जा सकता है. गाडरवारा का यह करीब 111 साल पुराना पुस्तकालय पिछले सौ वर्षों से उन मूल प्रतियों को सहेजे हुए है, जो किसी विरासत से कम नहीं हैं.

महात्मा गांधी द्वारा संपादित “हिंदी नवजीवन” हो या मदन मोहन मालवीय की “सनातन धर्म”, सभी की असली प्रतियां यहां सुरक्षित हैं. रोजाना बड़ी संख्या में पाठक इन बेशकीमती कृतियों के बीच अध्ययन कर खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं.

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