10 साल की बच्ची के दिल में था छेद, भोपाल AIIMS के डॉक्टरों ने मासूम को दी नई जिंदगी, नई उपलब्धि

OSASD से पीड़ित 10 साल की बच्ची का वजन नहीं बढ़ पा रहा था और उसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी. एम्स भोपाल में जब मरीज की जांच की गई तो उसमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का पता चला.

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भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने हासिल की नई उपलब्धि

Bhopal AIIMS: भोपाल के एम्स हॉस्पिटल (Bhopal AIIMS) के हृदय रोग विभाग के डॉक्टर्स ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है. एम्स भोपाल में ओस्टियम सेकुंडम एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (OSASD) से पीड़ित एक 10 वर्षीय बच्ची की सफल पर्क्यूटेनियस क्लोजर प्रक्रिया की गई है. ओएसएएसडी में दिल के अंदर एक छेद होता है जिससे दोनों तरफ से रक्त का मिश्रण होता है और हृदय की कार्य क्षमता कम हो जाती है.

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नहीं बढ़ रहा था बच्ची का वजन

भोपाल के अस्पताल में यह प्रक्रिया सामान्य एनेस्थीसिया के तहत एएसडी डिवाइस का इस्तेमाल करके की गई थी, जो संस्थान में अपनी तरह की पहली प्रक्रिया थी. OSASD से पीड़ित 10 साल की बच्ची का वजन नहीं बढ़ पा रहा था और उसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी. एम्स भोपाल में जब मरीज की जांच की गई तो उसमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का पता चला.

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कार्यपालक निदेशक ने पूरी टीम को दी बधाई

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह, डॉ. मधुर जैन, डॉ. किसलय श्रीवास्तव के साथ एनेस्थीसिया से डॉ. वैशाली वेंडेस्कर, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. सीमा, डॉ आशिमा, कैथ लैब तकनीशियन और नर्सिंग अधिकारियों की टीम ने पूरी लगन के साथ इस प्रक्रिया को संपन्न किया. यह उपलब्धि एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ ) अजय सिंह के मार्गदर्शन में हासिल की गई. उन्होंने पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है.