Varicose Veins : त्योहारी सीजन में थकान बढ़ा सकती है वैरिकोज़ वेंस की समस्या, ऐसे रखें ख्याल

एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि आप अपने खान-पान पर ध्यान दें, तो आपको इस समस्या से राहत मिल सकती ( improve varicose veins) है. आइए सबसे पहले जानते हैं कि यह समस्या क्यों होती है?

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Varicose veins: अक्टूबर-नवंबर को त्योहार का सीजन माना जाता है. इन महीनों में आप नहीं चाहते हुए भी किचन में कुछ न कुछ रेसिपी ट्राई कर लेती हैं. हेल्दी होने के बावजूद इसे तैयार करना आपकी हेल्थ को प्रभावित कर जाता है. दरअसल, लंबे समय तक एक स्थान पर खड़े रहने पर आपको वैरिकोज वेंस की समस्या होने लगती है. इसके कारण आपको पैरों में दर्द होने लगता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि आप अपने खान-पान पर ध्यान दें, तो आपको इस समस्या से राहत मिल सकती ( improve varicose veins) है. आइए सबसे पहले जानते हैं कि यह समस्या क्यों होती है?

क्यों होता है वैरिकोज वेंस ? (Varicose veins)
हॉर्मोन एंड गट हेल्थ कोच मनप्रीत कालरा बताती हैं कि ‘वैरिकोज़ वेंस' की समस्या आम है. यह कमजोर या क्षतिग्रस्त नसों की दीवारों और वाल्वों के कारण होती है. नसों के अंदर एक-तरफ़ा वाल्व होते हैं, जो हृदय की ओर रक्त के प्रवाह को बनाए रखने के लिए खुलते और बंद होते हैं. नसों में कमजोर या डैमेज वाल्व या वाल्स ब्लड को एक जगह जमा कर देती है. यहां तक कि पीछे की ओर भी यह फ्लो कर सकती हैं. इसका कोई इलाज तो नहीं है. ब्लड फ्लो बढ़ाने और नसों में दबाव कम करने के लिए दिन भर में कई बार अपने पैरों को कमर से ऊपर उठाना चाहिए.

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सोल्टी फ़ूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फ़ूड शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाने का कारण बनते हैं. इससे वैरिकोज़ नसों पर अधिक दबाव पड़ता है और ब्लड फ्लो बाधित होता है. आहार में पर्याप्त फाइबर नहीं मिलने से पाचन तंत्र में कब्ज हो जाता है. इसके कारण वैरिकोज़ वेंस की समस्या होती है.

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विटामिन K2 के लो लेवल के कारण इलास्टिन का कैल्सीफिकेशन होता है. इसके कारण डबल चिन, पाइल्स और वैरिकोज़ वेंस होते हैं. विटामिन K छोटे ब्लड वेसल्स की दीवारों को खिंचाव और टूटने से बचाने के लिए मजबूत कर सकता है.

 वैरिकोज़ वेंस से आराम दिलाने के 3 टिप्स 

1. भोजन में बल्किंग एजेंट शामिल करें 
मनप्रीत कालरा बताती हैं कि सायलियम हस्क (Psyllium Husk), या सायलियम सीड और पेक्टिन बल्किंग एजेंट हैं. इन्हें अपने आहार में शामिल करना चाहिए. ये फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पेट में फूलते हैं. ये बोवेल मूवमेंट के दौरान पानी जोड़ते हैं. ये स्टूल को नरम बनाते हैं. कुल मिलाकर ये माइल्ड लैक्सेटिव होते हैं.

2. कुट्टू को शामिल करें 
मनप्रीत कालरा के अनुसार, बकव्हीट यानी कुट्टू के आटे को आहार में शामिल किया जा सकता है. इसमें एक प्रकार का फ्लेवोनोइड रुटिन पाया जाता है, जिसे डॉक्टर वैरिकोज़ वेंस के रोगियों को लेने की सलाह देते हैं. यह एक प्रकार का फ्लेवोनोइड है,जो वस्कुलर हेल्थ को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है.

3. फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ 
जिन लोगों को वैरिकोज़ वेंस की समस्या है, वे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खूब खाएं. फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- ओट्स, दाल, सेब आदि को अपने डेली डाइट में शामिल करें. इनके अलावा प्रूनस, रेजिन, सेम, दाल और मटर भी खाना चाहिए. सेब, नाशपाती, संतरा और बेरीज जैसे फाइबर युक्त फल भी वेरिकोज वेंस में नसों को रिपेयर करने में मदद करते हैं .ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स और पालक भी बोवेल मूवमेंट कर वैरिकोज़ वेंस की समस्या में राहत पहुंचाते हैं.

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