खेला नहीं कर पाए तेजस्वी! अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाए गए स्पीकर अवधबिहारी चौधरी

Awadh Bihari Choudhary: जेडीयू ने साफ किया था कि विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद सबसे पहले स्पीकर पद से अवधबिहारी चौधरी को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा.

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बिहार (Bihar) में सियासी सरगर्मी के बीच आरजेडी (RJD) कोटे के स्पीकर अवध बिहारी चौधरी (Awadh Bihari Choudhary) ने कुर्सी छोड़ दी. उन्होंने स्पीकर की कुर्सी अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पास होने से पहले छोड़ी. दरअसल, सोमवार, 12 फरवरी को बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद स्पीकर को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिसके बाद अवध बिहारी चौधरी को अपना पद छोड़ना पड़ा. बता दें कि ये पहले से ही तय माना जा रहा था कि स्पीकर के पद पर अवध बिहारी चौधरी नहीं रहेंगे.

मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना संविधान की प्रक्रिया है: अवध बिहारी चौधरी

अवध बिहारी चौधरी ने पद छोड़ते हए कहा, 'मैं डेढ़ साल तक अध्यक्ष के पद पर रहा. मैं उप मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट करता हूं. जो आज है कल नहीं रहेगा. मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना संविधान की प्रक्रिया है. 

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अवध बिहारी चौधरी ने कहा, 'राजनीति आंकड़ों का खेल है. सत्ता आएगी और जाएगी. सदन की सर्वभौमिकता बरकरार रहेगी. आज जो है, वो कल नहीं होगा. मैंने अपने कर्तव्य का पालन किया है.'

स्पीकर के हटने के बाद विधानसभा के उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी (Maheshwar Hazari) ने सदन की कार्यवाही का संचालन किया. 

स्पीकर अवध बिहारी चौधरी ने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास

बिहार विधानसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया है. दरअसल, सदन में बजट सत्र की शुरुआत में ही सदन में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया. सदन में ये प्रस्ताव बीजेपी (BJP) विधायक नंदकिशोर यादव (Nand Kishore Yadav) ने पेश किया. इसके बाद वोटिंग हुई. वोटिंग के दौरान स्पीकर को हटाने के लिए 125 लोगों ने सहमति जताई. वहीं ना कहने वालों की संख्या 112 रही. 

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मालूम हो कि कुछ ही देर बाद नीतीश कुमार की सरकार को बिहार विधानसभा में बहुमत हासिल करना है. हालांकि इससे पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से अपने-अपने दावे पेश किए जा रहे हैं.

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यहां जानें सदन का समीकरण 

बता दें कि बिहार विधानसभा में कुल विधायको की संख्या 243 है. बहुमत का आंकड़ा 122 है. यानी कि किसी भी सरकार को सदन में 122 विधायकों का समर्थन जरूरी है. अगर बात एनडीए (NDA) यानी सत्ता पक्ष की करें तो सत्ता पक्ष का दावा है कि उसके पास 128 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी (BJP) के 78, जदयू (JDU) के 45, हम (Hindustani Awam Morcha) के 4 और एक निर्दलीय सुमित कुमार सिंह शामिल हैं.

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