Sumit Gahlawat बोले- 'Vipul Shah के साथ काम करना उनका अब तक का सबसे विकसित सहयोग'

Sumit Gahlawat In The Kerala Story 2: स्क्रिप्ट पहली बार पढ़ने के अपने अनुभव को याद करते हुए सुमित गहलावत बताते हैं कि जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी, तो समझ गया कि यह किरदार बेहद परतदार है.

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Sumit Gahlawat In The Kerala Story 2: सुमित गहलावत (Sumit Gahlawat), द केरला स्टोरी 2 (The Kerala Story 2) में अपने अब तक के सबसे परतदार किरदारों में से एक निभाते नजर आएंगे और इस भूमिका के लिए उन्होंने तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी. हाल ही में रिलीज हुए ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है. सुमित गहलावत इस अनुभव को बेहद क्रिएटिव और सहयोगात्मक बताते हैं. इससे पहले द केरला स्टोरी और बस्तर में विपुल शाह के साथ काम कर चुके सुमित के लिए यह उनकी तीसरी साझेदारी है, लेकिन उनके मुताबिक यह सबसे ज्यादा विकसित महसूस हुई.

सुमित गहलावत बताते हैं

स्क्रिप्ट पहली बार पढ़ने के अपने अनुभव को याद करते हुए सुमित गहलावत बताते हैं कि जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी, तो समझ गया कि यह किरदार बेहद परतदार है. लगभग हर सीन के साथ भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से एक नई गहराई सामने आती है. यही प्रोग्रेशन मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित कर गया. सुमित ने आगे कहा कि किरदार के साथ न्याय करने के लिए कलाकारों के 12–13 लंबे प्रेप सेशंस हुए, जिनमें विपुल शाह अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद खुद मौजूद रहे, हमारी कई डिटेल्ड चर्चाएं हुईं और जो बात सबसे ज्यादा खास लगी वह थी विपुल शाह की लगातार भागीदारी, उनका शेड्यूल कितना भी व्यस्त क्यों न हो, वह हर सेशन में मौजूद रहते थे. ऐसी लगन आपको अपना स्तर और ऊपर ले जाने के लिए प्रेरित करती है.

विपुल शाह और कामाख्या नारायण

सुमित का कहना है कि विपुल शाह और कामाख्या नारायण सिंह दोनों ने सेट पर एक सुरक्षित और खुला क्रिएटिव माहौल बनाया. यह हमारी तीसरी साझेदारी थी, इसलिए भरोसा पहले से था. लेकिन इस बार कम्फर्ट लेवल बेमिसाल था. विपुल शाह और कामाख्या नारायण सिंह ने हमें अपने क्रिएटिव इंस्टिंक्ट्स को खुलकर एक्सप्रेस करने की पूरी आजादी दी. सुमित बताते हैं कि कई मौकों पर उनके सुझावों की वजह से सीन में बड़े बदलाव भी किए गए. ऐसे कई पल आए जब मैं किसी सीन को बिल्कुल अलग नजरिए से करना चाहता था. विपुल शाह ने न सिर्फ धैर्य से सुना बल्कि सीन को पूरी तरह नया रूप देने के लिए भी तैयार रहे. कुछ सीक्वेंस तो हमारी बातचीत की वजह से 360 डिग्री बदल गए. वह कलाकारों की प्रक्रिया के प्रति बेहद संवेदनशील और सम्मानजनक हैं.

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