जंगली भैसें ‘छोटू’ के ल‍िए 17 गांवों के लोग छोड़ेंगे जमीन, क्‍यों ल‍िया ऐसा फैसला?

Chhattisgarh News: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के 17 गांवों ने जंगली भैंसा ‘छोटू’ (Wild Buffalo Chhotu) और उसकी प्रजाति को बचाने के लिए अपनी कब्जाई वन भूमि खाली करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है. jangli bhainsa के ल‍िए असम से तीन मादा भैंसें लाकर नस्ल बढ़ाने की योजना बनाई गई है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Wild Buffalo Chhotu in Udanti-Sitanadi Tiger Reserve Chhattisgarh (प्रतिकात्मक फोटो)
Avinash Jaiswal

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु जंगली भैंसे के अस्तित्व पर मंडराते संकट को दूर करने के लिए उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के कोर क्षेत्र से एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है. यहां रहने वाले 17 गांवों के वनवासी समुदायों ने मिलकर फैसला लिया है कि वे जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए खुद आगे आएंगे. मध्य भारत से लगभग विलुप्त हो चुकी शुद्ध नस्ल की जंगली भैंसों के लिए यह क्षेत्र अब आखिरी उम्मीद माना जा रहा है.

ग्राम सभाओं का बड़ा निर्णय

14 दिसंबर 2025 को USTR के उपनिदेशक वरुण जैन की मौजूदगी में हुई बैठक में 17 ग्राम सभाओं के प्रमुख, पूर्व सरपंच और स्थानीय प्रतिनिधियों ने जंगली भैंसों की संख्या बढ़ाने पर सहमति जताई. ग्रामीणों ने जंगल में आग लगने की घटनाएं रोकने, अवैध कटाई पर सख्ती और वन्यजीवों के आवास सुधार के लिए वन भूमि पर किए गए कब्जे खुद से हटाने का संकल्प लिया है. 

Wild Buffalo Chhotu in Udanti-Sitanadi Tiger Reserve Chhattisgarh (प्रतिकात्मक फोटो)
Photo Credit: Avinash Jaiswal

Wild Buffalo Chhotu: ‘छोटू' के लिए आएंगी तीन मादा भैंसें

वर्तमान में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में 26 वर्ष का एक नर जंगली भैंसा मौजूद है, जिसे ग्रामीण प्यार से ‘छोटू' कहते हैं. नस्ल विस्तार के लिए असम के बारनवापारा क्षेत्र से लाए गए कुनबे में से तीन मादा जंगली भैंसों को यहां शिफ्ट किया जाएगा. इन्हें 45 दिन क्वारंटीन में रखने, रेडियो कॉलर लगाने और विशेषज्ञों की निगरानी में जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि इनब्रीडिंग से बचा जा सके. इसके लिए घास के मैदान सुधारे गए हैं और सोलर पंप से जुड़े तालाब तैयार किए गए हैं. 

17 Villages Volunteer Land to Save Wild Buffalo ‘Chhotu' in Udanti-Sitanadi Tiger Reserve

हाई-टेक निगरानी और तेज मुआवजा व्यवस्था

वन्यजीव और ग्रामीणों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए एलिफेंट अलर्ट ऐप से जंगली भैंसों की लोकेशन ट्रैक की जाएगी. वहीं, वन भैंसा मित्र दल पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था संभालेगा. फसल या मवेशी नुकसान पर मुआवजे के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जा रहा है, जिससे 30 दिनों के भीतर सीधे भुगतान सुनिश्चित होगा.

Advertisement

Udanti Sitanadi Tiger Reserve: संरक्षण की नई मिसाल

ग्राम सभा फेडरेशन के अध्यक्ष अर्जुन सिंह नायक और करलाझर की सरपंच साहेबिन श्यामलाल का कहना है कि राजकीय पशु की रक्षा अब सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है. विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बचे लगभग 20 जंगली भैंसों में अधिकांश इंद्रावती नेशनल पार्क में हैं, जहां सुरक्षा और शांति बहाली बेहद जरूरी है. उदंती–सीतानदी के ग्रामीणों की यह पहल अब दुनिया के लिए एक मिसाल बन रही है कि कैसे इंसान और वन्यजीव साथ-साथ रहकर इकोसिस्टम को बचा सकते हैं.

यह भी पढें-  Chhattisgarh New Year: साल 2026 में छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी उम्मीदें क्या हैं? कौनसा प्‍लान होगा गेम चेंजर?