छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बढ़ी तकरार, सुशासन के दावों पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ में इन दिनों ब्यूरोक्रेसी और राजनेताओं के बीच टकराव की खबरें सुर्खियां बन रही हैं. कहीं विधायक पर अधिकारी से मारपीट का आरोप है, तो कहीं सांसद मंच से क्लास लगा रहे हैं. जानिए क्या है सुशासन के दावों के बीच इस सियासी घमासान की पूरी इनसाइड स्टोरी.

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छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बढ़ी तकरार, सुशासन के दावों पर उठे सवाल
Nilesh Tripathi

छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. दरअसल, सत्ता के गलियारों से लेकर सार्वजनिक मंचों तक, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे टकराव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सुशासन का दावा करने वाली सरकार के सामने अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर जनता के सेवक और जनता के प्रतिनिधि आपस में ही क्यों उलझ रहे हैं? दरअसल, राज्य में कहीं विधायक पर मर्यादा लांघने के आरोप लग रहे हैं, तो कहीं बेलगाम अधिकारी माननीयों को आंख दिखाते नजर आ रहे हैं.

इस पूरे विवाद के केंद्र में इन दिनों सरगुजा संभाग के सीतापुर से बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो हैं. सत्ताधारी दल के विधायक पर आरोप है कि उन्होंने एक नायब तहसीलदार को बुलाकर उनके साथ मारपीट की. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत का कहना है कि दोनों पक्षों की तरफ से शिकायतें मिली हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इस घटना ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मचा दिया है.

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ये तीन मामले दे रही हैं विफलता की गवाही

यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो अधिकारियों और माननीयों के बीच की खाई को बयां करते हैं.

केस 1 (रायपुर): बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने 'सुशासन तिहार' के एक सरकारी कार्यक्रम में मंच से ही एक अधिकारी को जमकर फटकार लगा दी. सांसद ने अधिकारी पर सीधे कमीशनखोरी का आरोप मढ़ दिया.

केस 2 (दुर्ग): थनौद में 29 मई को विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में ही एक अधिकारी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी जुबानी जंग हो गई. बात इतनी बढ़ गई कि अधिकारी ने जन प्रतिनिधियों के सामने ही 'जो करना है कर लो' की खुली चुनौती दे डाली.

केस 3 (कांकेर, सरगुजा और बिलासपुर): इन तीनों संभागों के अलग-अलग जिलों से लगातार अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान और तनाव की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे जमीनी स्तर पर काम प्रभावित हो रहे हैं.

सुशासन में नहीं चलेगी मनमानी: मुख्यमंत्री

प्रशासन और सरकार के बीच बढ़ते इस तालमेल के अभाव पर खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में चेतावनी देते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में ऐसा बिल्कुल नहीं चलेगा. अगर शिकायत सही पाई जाती है, तो चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी या व्यक्ति क्यों न हो, उस पर कार्रवाई तय है. उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार सुशासन की नीति पर काम कर रही है और इसमें किसी भी तरह का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दोनों पक्षों को नसीहत देते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनी हुई है और सबको उसी के दायरे में रहकर काम करना चाहिए. चाहे वह कोई आम नागरिक हो, अधिकारी हो या फिर जनप्रतिनिधि. सिंहदेव ने कहा कि अगर कोई अधिकारी बात नहीं सुन रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए वैधानिक रास्ते मौजूद हैं, किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है.

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