सूरजपुर के सरकारी स्कूल में बच्चों से झाड़ू लगवा रहे हैं शिक्षक ! BEO ने बताई अजीब बात

Surajpur School Video: सूरजपुर के बासदेवपुर दवनकरा स्कूल में बच्चों से टॉयलेट और झाड़ू लगवाने का वीडियो वायरल हुआ है. शिक्षक प्रदीप और राकेश पर लगे गंभीर आरोप, बीईओ ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है.

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Surajpur Student Cleaning Toilet: "साहब, हमसे रोज झाड़ू लगवाते हैं और टॉयलेट भी साफ कराते हैं." सूरजपुर के प्रतापपुर के एक सरकारी स्कूल से आई इन मासूम आवाजों ने शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. दरअसल प्राथमिक शाला बासदेवपुर दवनकरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें नन्हें बच्चे हाथों में झाड़ू थामे स्कूल की सफाई करते दिख रहे हैं. इस खुलासे के बाद से न केवल अभिभावक बल्कि पूरा गांव आक्रोशित है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है.

शिक्षकों पर 'जबरन सफाई' का संगीन आरोप

स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा चौथी के छात्र अमित और पांचवीं के छात्र उमेश ने कैमरे के सामने जो कुछ भी कहा, वह परेशान करने वाला है. बच्चों का आरोप है कि स्कूल के शिक्षक प्रदीप कुमार और राकेश उन पर दबाव बनाते हैं. बच्चों ने दावा किया कि उनसे न केवल रोजाना स्कूल परिसर में झाड़ू लगवाई जाती है, बल्कि शौचालयों की सफाई भी कराई जाती है. छात्र मुकेश राजवाड़े के मुताबिक, शिक्षकों ने नियम बना रखा है कि हर दिन दो छात्र टॉयलेट साफ करेंगे.

कलम की जगह हाथ में झाड़ू, परिजनों का फूटा गुस्सा

वीडियो सामने आते ही अभिभावकों का सब्र टूट गया. ग्रामीण फुलसाय पैकरा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम बच्चों को अफसर बनाने के लिए स्कूल भेजते हैं, सफाई कर्मचारी बनाने के लिए नहीं. जिन हाथों में किताब होनी चाहिए, वहां झाड़ू थमा देना बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है. गांव के उप सरपंच मुकेश राजवाड़े ने भी इन आरोपों की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि स्कूल में यह सब लंबे समय से चल रहा है और शिक्षक यह कहकर बच्चों को डराते हैं कि सफाई के लिए कोई दूसरा नहीं आएगा.

बीईओ का बयान: विवाद की भेंट चढ़ा बच्चों का बचपन

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब प्रतापपुर के बीईओ मुन्नूलाल धुर्वे से बात की गई, तो एक अलग ही कहानी सामने आई. बीईओ ने स्वीकार किया कि बच्चों से सफाई कराना गंभीर अपराध है. उन्होंने बताया कि स्कूल में स्वीपर की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन स्थानीय विवाद के कारण ऐसा नहीं हो सका है. दरअसल, जिस परिवार ने स्कूल के लिए जमीन दान दी थी, वे अपने ही आदमी को नौकरी पर रखने का दबाव बना रहे हैं. हालांकि, बीईओ ने साफ कहा कि आपसी विवाद की सजा बच्चों को नहीं दी जा सकती और जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
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