Chhattisgarh Surajpur Congress Resign: छत्तीसगढ़ में टी.एस. सिंहदेव (बाबा) और भूपेश बघेल (काका) के समर्थकों के बीच खींचतान ने एक बार फिर सूरजपुर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को सुर्खियों में ला दिया है. सूरजपुर जिला कांग्रेस के जिला संगठन में संयुक्त महामंत्री, महामंत्री और सचिव सहित 17 पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफे से सियासी पारा चढ़ गया है. इस्तीफों का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हलचल तेज हो गई, हालांकि आधिकारिक रूप से जिला कांग्रेस कमेटी को अब तक कोई इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है.
इस्तीफों के पीछे गुटीय असंतोष?
सूत्रों के मुताबिक इस्तीफा देने वालों में ज्यादातर नेता टी.एस. सिंहदेव खेमे से जुड़े माने जाते हैं. इनमें पूर्व मंत्री व सांसद खेल साय सिंह की बहू का नाम भी चर्चा में है.
Chhattisgarh Surajpur Congress
बताया जा रहा है कि संगठन में भूपेश बघेल समर्थकों को तरजीह दिए जाने से असंतोष पनपा. विवाद की जड़ ‘संगठन सृजन' अभियान के तहत जिलाध्यक्ष चयन को माना जा रहा है.
सरगुजा पैलेस समर्थित नामों को स्थानीय स्तर पर समर्थन नहीं मिला, जिसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व की सहमति से युवा नेत्री शशि सिंह को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
जिलाध्यक्ष चयन पर मचा घमासान
पूर्व जिलाध्यक्ष भगवती राजवाड़े को दोबारा मौका दिलाने की कोशिशें भी चर्चा में रहीं, पैलेस समर्थकों ने एड़ी चोटी का जोर लगाया, लेकिन आलाकमान ने सर्वसम्मति से आए नाम को प्राथमिकता दी.
दिलचस्प यह कि कार्यकारिणी की अंतिम सूची सरगुजा संभाग के वरिष्ठ नेताओं को पहले ही भेजी गई थी और उस समय कोई आपत्ति सामने नहीं आई. मगर घोषणा होते ही समर्थकों के इस्तीफों की झड़ी ने कई सवाल खड़े कर दिए.
जनपद सदस्य भावना सिंह ने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए कहा कि बिना पूछे जिम्मेदारी दिए जाने के कारण उन्होंने पद छोड़ा है, पार्टी नहीं.
वहीं जिला महामंत्री संगठन संजय दोषी ने सोशल मीडिया पर इस्तीफा वायरल करने को अनुचित बताया और कहा कि हर समस्या के समाधान के लिए पार्टी मंच मौजूद है.
बीजेपी का तंज
इस बीच बीजेपी ने भी तंज कसते हुए इसे ‘काका-बाबा' की पुरानी लड़ाई करार दिया. जिला अध्यक्ष मुरली सोनी ने कहा कि सत्ता में रहते हुए भी यही खींचतान विकास में बाधा बनी और अब विपक्ष में रहते हुए भी जारी है.
अब बड़ा सवाल यही है. क्या ‘संगठन सृजन' कांग्रेस को नई मजबूती देगा या यह गुटबाज़ी पार्टी की जड़ों को और कमजोर करेगी? फिलहाल सूरजपुर कांग्रेस की राजनीति में सन्नाटा नहीं, बल्कि रणनीतिक हलचल साफ नजर आ रही है.