Sanjay Dahria Struggle Story: यूपीएससी परीक्षा 2025 का रिजल्ट (UPSC Exam 2025 Result) जारी कर दिया गया है. यूपीएससी परीक्षा में छत्तीसगढ़ के महासमुंद के संजय डेहरिया (Sanjay Dahria) ने 946 रैंक हासिल की है. संजय की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटी छोटी परेशानी में डिप्रेशन में आ जाते है... संजय डेहरिया चार बार कैंसर से जंग जीतकर यूपीएससी क्लियर किया. संजय ने साबित किया कि उड़ान पंखों से नहीं, हौसलों से होती है... इतना ही नहीं बचपन में उनके घर में खाने को नहीं होता था. कई बार मां भूखी रह जाती थीं. इसके बावजूद उन्होंने इन हालातों से हार नहीं मानी और IAS अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे साकार भी किया.
7 सालों तक कैंसर से जूझते रहे संजय डहरिया
संजय डहरिया महासमुंद जिले के बेलटुकरी के रहने वाले हैं. गांव से निकलर यूपीएसी में चयन होने तक सजंय की कहानी काफी संघर्षों, दर्दभरी और चुनौतीपूर्ण रही. यूपीएसी की तैयारी से पहले वो 7 सालों तक कैंसर की बीमारी से जूझते रहें. इस दौरान वो भगवान से ऐसे जीवन ना होने की शिकायत की. हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी... जब वो कैंसर से उबरे, तब 2022 में यूपीएसी की तैयारी शुरू की.
10वीं कक्षा में देखा था IAS अधिकारी बनने का सपना
संजय 5वीं तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है. हालांकि पांचवी कक्षा में उनका चयन नवोदय विद्यालय के लिए हो गया. उन्होंने नवोदय विद्यालय से 12वीं तक पढ़ाई की. बता दें कि संजय ने 10वीं कक्षा में एक आईएएस अधिकारी को देखकर आईएएस बनने का सपना देखा. हालांकि वो 2012 में कैंसर के शिकार हो गए. इलाज के दौरान पिता लखन डहरिया और माता रेशम डहरिया के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई. बेटे के लिए माता-पिता ने किसी भी तरह इलाज का खर्च उठाया.
2022 में शुरू की UPSC की तैयारी
2012 से 2018 तक चार बार कैंसर से जंग जीती. वहीं संजय कैंसर से 2018 में उबर गए. इसके बाद उन्होंने अपना सपना साकार करने का निर्णय लिया और उन्होंने 2022 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की.
4 सालों की मेहनत के बाद हासिल की सफलता
इसके लिए वो रायपुर के चौबे कॉलोनी में 100 स्क्वायर फीट के किराए से मकान लिया. वहीं नालंदा परिसर स्थित लाइब्रेरी में बैठकर यूपीएसी की तैयारी की. हालांकि 4 सालों की मेहनत और संघर्ष के बाद संजय डहरिया को यूपीएससी में सफलता मिली.
Sanjay Dahria Success Story: 100 स्क्वायर फीट के किराए के मकान में की पढ़ाई.
संजय डहरिया बताते हैं कि बचपन में उनके घर में खाने को नहीं होता था. उनकी मां अक्सर भूखी रह जाती थी. मां चार बच्चों को खाना खिलाती, लेकिन ख़ुद भूखी होती थी.
संजय आगे बताते हैं कि मेडिकल ग्राउंड और रिज़र्व कैटेगरी की रैंकिंग में उन्हें आईएएस अवार्ड मिल सकता है. आईएएस तो पक्का है... बता दें कि संजय डहरिया आईएएस बनकर समाज के लिए कुछ करने के लिए संकल्पित है.