Raipur Marine Drive Parking Fee: मरीन ड्राइव आने वाले को अब देना होगा पार्किंग शुल्क, 4 और 12 घंटे के हिसाब से लगेगा इतना चार्ज

Raipur Marine Drive Parking Fee: रायपुर मेयर मीनल चौबे ने कहा कि व्यवस्था सुधारने के लिए यह निर्णय लिया गया है. अगर इससे किसी को तकलीफ है तो उसके सुझाव भी सुने जाएंगे. मेयर ने आगे कहा कि अव्यवस्थित पार्किंग ना हो इसके लिए ही नगर पालिक निगम द्वारा यह व्यवस्था की जा रही है.

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Telibandha Pond, Raipur Marine Drive Parking Fee: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तेलीबांधा तालाब यानि कि मरीन ड्राइव आने वाले लोगों को अब पार्किंग शुल्क देना होगा. मरीन ड्राइव के पास वाहन पार्क करने पर शुल्क लेने का ऐलान नगर पालिक निगम रायपुर ने कर दिया है. जगह-जगह इसको लेकर बोर्ड भी लगा दिए गए हैं. प्रति 4 घंटे के लिए कर पार्किंग करने पर 20 रुपये अदा करने होंगे, जबकि बाइक पार्किंग के लिए प्रति 12 घंटे के लिए 10 रुपये शुल्क रखा गया है.

मरीन ड्राइव घूमने वालों के लिए बड़ी खबर, अब देना होगा पार्किंग शुल्क

रायपुर की मेयर मीनल चौबे का कहना है कि नगर पालिका निगम का यह फैसला लोगों को राहत देने के लिए है. तेलीबांधा तालाब के आसपास अव्यवस्थित पार्किंग होने से लोगों को परेशानी होने की शिकायत लगातार मिल रही थी. ऐसे में पार्किंग की व्यवस्था कर नगर निगम व्यवस्था सुधारना चाहती है. इसके पीछे नगर निगम का उद्देश्य पैसा कमाना नहीं है.

वहन की जिम्मेदारी नहीं लेगा नगर निगम 

हालांकि तेलीबांधा पार्किंग स्थल पर लगाए गए बोर्ड में नगर निगम प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वाहन की सुरक्षा की गारंटी नगर निगम नहीं लेगा. नगर पालिका निगम ने बोर्ड में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि अगर खड़ी वाहन को कोई चोट पहुंचती है या फिर कोई सामान चोरी होता है तो इसकी जिम्मेदारी नगर पालिक निगम प्रशासन की नहीं होगी. 

पार्किंग शुल्क पर क्या बोले पर्यटक

शनिवार को तेलीबांधा तालाब में सैर करने पहुंचे अमित ठाकुर का कहना है कि अगर पैसे नगर पालिक निगम ले रहा है तो सुरक्षा की गारंटी फिर कौन लेगा? कई साल से यहां पर वहां खड़े हो रहे हैं बगैर पार्किंग शुल्क दिए. किसी को कोई परेशानी नहीं होती है. अब अगर नगर पालिका निगम पैसे लेने का फैसला लिया है तो फिर सुरक्षा की गारंटी भी उसे ही लेनी चाहिए.

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रजनी मिश्रा का कहना है कि राज्य सरकार हो या फिर शहर सरकार जनता पर आर्थिक बोझ डालने में किसी भी मामले में यह पीछे नहीं रहने वाली. सरकार मौका ढूंढते रहती की किस तरह से जनता के पैसों की वसूली की जाए. वर्षों से जो व्यवस्था निशुल्क थी और कोई दिक्कत नहीं हो रही थी तो अब फिर इस तरह का निर्णय क्यों लिया जा रहा है?

हालांकि रायपुर की मेयर मीनल चौबे का कहना है कि अगर इस फैसले से अगर इससे किसी को तकलीफ है तो उसके सुझाव भी सुन जाएंगे. अव्यवस्थित पार्किंग ना हो इसके लिए ही नगर पालिक निगम व्यवस्था की जा रही है.

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