Fake Paneer Seized Raipur: रायपुर में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. नकली पनीर के बढ़ते मामलों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1700 किलो अमानक पनीर को जेसीबी से नष्ट कर दिया. यह कार्रवाई न केवल मिलावटखोरों के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ प्रशासन की गंभीरता को भी दिखाती है.
ये कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने रायपुर में मिलावट के खिलाफ अभियान के तहत की. जांच में फेल पाए गए पनीर को भाठागांव के मैदान में जेसीबी से गड्ढा खोदकर उसमें डालकर नष्ट किया.
जांच में फेल हुआ पनीर
यह 1700 किलो पनीर भाठागांव स्थित मेसर्स केएलपी डेयरी एंड मिल्क प्रोडक्ट्स से जब्त किया गया था. पनीर के सैंपल लैब भेजे गए थे, जहां जांच में वह अमानक पाया गया. रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने उसे नष्ट करने का निर्णय लिया.
गंदे हालात में हो रहा था निर्माण
7 जनवरी 2026 को अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने संबंधित डेयरी का निरीक्षण किया था. जांच के दौरान पाया गया कि पनीर का निर्माण बेहद अस्वस्थ और गंदे माहौल में किया जा रहा था, जो सीधे तौर पर लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है.
जब्त किए गए 1700 किलो लूज पनीर की कीमत करीब 4.76 लाख रुपये आंकी गई है. विभाग अब डेयरी संचालक के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी कर रहा है और आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
2025 में अब तक 9700 किलो नकली पनीर जब्त
खाद्य विभाग के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक रायपुर जिले में पनीर, एनालॉग पनीर और खोवा के 35 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं. इनमें से करीब 9700 किलो अमानक पनीर और नकली खोवा जब्त कर नष्ट किया जा चुका है. अब तक ऐसे मामलों में 10 प्रकरण न्यायालय में पेश किए जा चुके हैं, जिन पर सुनवाई जारी है. विभाग का कहना है कि मिलावट करने वालों को किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा.
आम जनता से की गई अपील
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि अगर कहीं भी मिलावटी खाद्य सामग्री दिखाई दे, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं. इसके लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 9340597097 जारी किया है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि डेयरी दुकानों और पनीर निर्माण इकाइयों की नियमित जांच आगे भी जारी रहेगी. मिलावट करने वालों पर बिना किसी दबाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य पदार्थ मिल सकें.