छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक अदालत ने अंधविश्वास और अवैध धर्मांतरण के एक रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने झाड़-फूंक और 'चमत्कारी इलाज' के नाम पर एक 18 वर्षीय युवती की जान लेने वाली आरोपी महिला ईश्वरी साहू को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है. इस फैसले के बाद प्रदेश में 'धर्म स्वातंत्र्य कानून' को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
क्या है पूरा मामला?
यह घटना गरियाबंद जिले की है. राजिम थाना क्षेत्र की रहने वाली सुनीता सोनवानी ने अपनी 18 वर्षीय बेटी योगिता सोनवानी की मानसिक स्थिति ठीक न होने पर आरोपी ईश्वरी साहू से संपर्क किया था. लोगों ने बताया था कि ईश्वरी झाड़-फूंक के जरिए असाध्य बीमारियों का इलाज करती है.
23 मई 2025 को दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी ईश्वरी ने इलाज के नाम पर युवती के शरीर पर खौलता हुआ गर्म तेल डाल दिया. जब मां ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने दावा किया कि यह "प्रभु यीशु का चमत्कारी तेल" है और इससे सारी बीमारियां दूर हो जाएंगी. इलाज के दौरान आरोपी युवती के ऊपर चढ़ गई और अपने पैरों से उसके शरीर पर भारी दबाव बनाया. इस दौरान परिजनों को जबरन ईसा मसीह की प्रार्थना करने पर मजबूर किया गया. लगातार दी जा रही इन यातनाओं को युवती का शरीर सहन नहीं कर सका और 22 मई 2025 को योगिता की इलाज के दौरान मौत हो गई.
कोर्ट का सख्त फैसला
पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर हत्या और धर्मांतरण की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पाया कि आरोपी के कृत्यों के कारण ही युवती की जान गई. अदालत ने ईश्वरी साहू को हत्या की धारा के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई. धर्म स्वातंत्र्य कानून के उल्लंघन के लिए 1 साल की अतिरिक्त सजा दी.
सियासी गलियारों में उबाल: बीजेपी का कांग्रेस पर हमला
इस फैसले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'धर्म स्वातंत्र्य कानून' की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है. भाजपा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस को घेरा. बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि, "हम प्रलोभन, अंधविश्वास और इलाज के नाम पर होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए ही 'धर्म स्वातंत्र्य कानून' लेकर आए थे. कांग्रेस ने इस कानून का पुरजोर विरोध किया था. आज कोर्ट का फैसला यह साबित करता है कि प्रदेश की बेटियों को बचाने के लिए यह कानून कितना जरूरी है." भाजपा अब कांग्रेस से सवाल कर रही है कि क्या वह अभी भी ऐसे कृत्यों को संरक्षण देने वाली विचारधारा के साथ खड़ी है या इस कानून का समर्थन करेगी.
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