Paan Farming: पान की विलुप्त होती खेती को बचाने की पहल; छुईखदान में शोध केंद्र शुरू, शेडनेट पर 50% अनुदान

Paan Ki Kheti: छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र की स्थापना से विलुप्त होती पान खेती को पुनर्जीवन मिल रहा है. शेडनेट हाउस पर 50% अनुदान और एक्सपर्ट्स के मार्गदर्शन से किसान लाभान्वित हो रहे हैं.

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Paan Farming: पान की विलुप्त होती खेती को बचाने की पहल; छुईखदान में शोध केंद्र शुरू, शेडनेट पर 50% अनुदान

Paan Ki Kheti: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई क्षेत्र में लुप्त होती पारंपरिक पान की खेती (Paan Ki Kheti) को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. वर्ष 2023-24 में घोषित पान अनुसंधान केन्द्र (Paan Research Center) अब रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय (Rani Avanti Bai Agricultural College), छुईखदान में स्थापित कर दिया गया है. लंबे समय से तकनीकी सहायता न मिल पाने और क्वॉलिटी प्लांटिंग मटेरियल के अभाव में पान की खेती लगभग समाप्ति की ओर थी, लेकिन नए केन्द्र की स्थापना से किसानों में उत्साह लौट आया है.

Paan Ki Kheti: पान की खेती

शेडनेट हाउस निर्माण पर 50% अनुदान, 7 किसानों को मिला लाभ

पान उत्पादक कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग की ओर से शेडनेट हाउस निर्माण पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. वर्तमान में 7 किसानों द्वारा प्रति कृषक 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में शेडनेट हाउस का निर्माण कराया गया है. उद्यानिकी विभाग ने प्रत्येक किसान को 1.77 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया है. इनमें से 6 किसान वर्तमान में पान की खेती शुरू कर चुके हैं. शेडनेट हाउस निर्माण से किसान प्रतिकूल मौसम में भी नियंत्रित वातावरण में उत्पादन कर सकेंगे, जिससे आय में वृद्धि की उम्मीद है.

Paan Ki Kheti: पान के खेत में किसान

कुकुरमुड़ा और बीरूटोला में प्रदर्शन प्लॉट तैयार

प्लांटिंग मटेरियल की लगातार उपलब्धता बनी रहे इसके लिए कृषि महाविद्यालय के सहयोग से शासकीय उद्यान रोपणी कुकुरमुड़ा और बीरूटोला में भी प्रदर्शन प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं. इन प्लॉटों पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधों से बीज और अन्य सामग्री तैयार होकर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी.

प्रशासन की सतत मॉनिटरिंग, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन

जिला प्रशासन इस विशेष पहल की नियमित मॉनिटरिंग कर रहा है. कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी समय‑समय पर साइट्स की विजिट कर दिशा‑निर्देश दे रहे हैं. साथ ही कृषि महाविद्यालय के विषय विशेषज्ञ किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, खेती की उन्नत विधियाँ और आधुनिक प्रबंधन तकनीकें उपलब्ध करा रहे हैं. इस संयुक्त प्रयास से जिले में पान की परंपरागत खेती को नई पहचान मिलने की उम्मीद है और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी संभव है.

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