Paper Leak in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) के तहत संचालित जांजगीर चांपा के 4 महाविद्यालयों में डी. फार्मेसी के दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में संगठित और हाईटेक नकल का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. दरअसल, कुलपति डॉ. अरुण अरोड़ा ने सूचना के आधार पर तत्काल 4 जांच दलों का गठन कर जांजगीर चांपा भेजा.
विश्वविद्यालय की ओर से बनाए गए उड़नदस्ते की टीमें जब जांजगीर-चांपा जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. जांच में यह भयावह बात सामने आया कि परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट पहले ही प्रश्न पत्र और उनके हल व्हाट्सएप पर वायरल हो चुके थे. निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा परीक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के इस्तेमाल को लेकर हुआ.
हूबहू मिले छात्रों के उत्तर
जांच में ये बात सामने आई कि कई केंद्रों पर परीक्षार्थी मोबाइल फोन के जरिए एआई ऐप्स की मदद से लंबे-लंबे उत्तर लिख रहे थे. टीम ने मौके से कई मोबाइल जब्त किए हैं, जिनमें एआई की मदद से तैयार किए गए उत्तरों के पुख्ता प्रमाण मिले हैं. इसके अलावा, सामूहिक नकल का आलम यह था कि अधिकांश छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) के जवाब हुबहू एक जैसे पाए गए. प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, लगभग 500 छात्र इस सुनियोजित धांधली में शामिल हैं.
महाविद्यालयों की भारी लापरवाही आई सामने
केसरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, जांजगीर-चांपा द्वारा जांच दल को सहयोग करने के बजाय सीसीटीवी का डीवीआर (DVR) देने से साफ इनकार कर दिया गया. वहीं, ज्ञान रोशनी फार्मेसी कॉलेज में पर्यवेक्षक की टेबल से ही 20 पन्नों की नकल सामग्री बरामद हुई. नियम विरुद्ध तरीके से दो के बजाय केवल एक ही शिक्षक केंद्र पर तैनात मिला. संस्कृति इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पामगढ़ के आठ कमरों में चल रही परीक्षा के लिए पर्याप्त स्टाफ तक नहीं था. हद तो तब हो गई, जब वहां तैनात शिक्षक कमल कुमार के मोबाइल में ही परीक्षा के उत्तरों की सॉफ्ट कॉपी मिली, जिसे विश्वविद्यालय ने फौरन जब्त कर लिया.
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परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी कैमरे कर दिए गए थे बंद
इस पूरे गिरोह के तार 'आयुष कॉलेज ऑफ फार्मेसी' (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) से भी जुड़े मिले, जहां एक संदिग्ध शख्स को दबोचा गया. पूछताछ में उसने कबूल किया कि प्रश्न पत्र को आईपीएस रतनपुर से बाहर निकालकर व्हाट्सएप के माध्यम से अलग-अलग केंद्रों तक फैलाया गया था. जांच टीम को यह भी पता चला है कि नकल को बढ़ावा देने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत कई केंद्रों के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे.
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