न आटा है न दाल है, घर का बुरा हाल है... छत्तीसगढ़ में क्यों हड़ताल कर रहे हैं NHM कर्मचारी? जानिए मांग

NHM Employees Strike: हड़ताल के कारण शासकीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच, टीबी-कुष्ठ-मलेरिया जांच, ओपीडी, नवजात शिशु देखभाल, आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण पुनर्वास केंद्र, वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण और एनसीडी स्क्रीनिंग जैसी सेवाएं पूरी तरह ठप हैं.

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NHM Employees Strike: न आटा है न दाल है, घर का बुरा हाल है... छत्तीसगढ़ में क्यों हड़ताल कर रहे हैं NHM कर्मचारी? जानिए मांग

NHM Employees Strike Protest: छत्तीसगढ़ में एनएचएम (NHM) कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल तेरहवें दिन भी जारी रही. बालोद जिला मुख्यालय में प्रदर्शन के दौरान आज एक तस्वीर सबका ध्यान खींच लाई—मां की गोद में बैठी मासूम बच्ची ने हाथों में तख्ती थाम रखी थी, जिस पर लिखा था— “न आटा है न दाल है, घर का बुरा हाल है, संविदा ने बिगाड़ा हाल है.” यह दृश्य कर्मचारियों की मजबूरी और उनके घरों की बदहाल स्थिति को बयां करता रहा. हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में किया जा रहा है. कर्मचारियों ने बताया कि बीते वर्षों में वे 160 से ज्यादा ज्ञापन शासन को सौंप चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर वे आंदोलन को मजबूर हुए.

क्या है मामला?

प्रदेशभर के 16,000 से ज्यादा एनएचएम कर्मचारी नियमितीकरण/सविलियन, ग्रेड पे, लंबित 27% वेतन वृद्धि सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर डटे हुए हैं. वहीं स्वास्थ्य सचिव ने आदेश जारी कर कर्मचारियों को ड्यूटी जॉइन करने की चेतावनी दी है, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही है. हालांकि, कर्मचारियों का उत्साह कम नहीं हुआ. उनका कहना है कि जब तक लिखित आदेश जारी नहीं हो जाते, आंदोलन जारी रहेगा.

सेवाएं ठप, ग्रामीण सबसे ज्यादा परेशान

हड़ताल के कारण शासकीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच, टीबी-कुष्ठ-मलेरिया जांच, ओपीडी, नवजात शिशु देखभाल, आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण पुनर्वास केंद्र, वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण और एनसीडी स्क्रीनिंग जैसी सेवाएं पूरी तरह ठप हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है, क्योंकि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भी हड़ताल पर हैं, जिससे आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का ओपीडी बंद पड़ा है.

सांसद का समर्थन

इस बीच सांसद विजय बघेल ने भी कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा कि घोषणा पत्र में जो वादे किए गए थे, उन पर सरकार को अमल करना चाहिए. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर वे स्वयं मुख्यमंत्री और मंत्री से चर्चा करेंगे.

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सवालों के घेरे में सरकार

एक तरफ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पंगु हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के घरों का चूल्हा ठंडा पड़ने की स्थिति है. मासूम बच्चे की तख्ती ने आज आंदोलन का दर्द साफ-साफ सामने रख दिया. सवाल यह है कि क्या सरकार अब भी चुप बैठी रहेगी या फिर इस मासूम की आंखों से झांकते संघर्ष को देखकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगी?

कांग्रेस ने क्या कहा?

एनएचएम कर्मचारियों को नोटिस पर कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि यह सरकार की तानाशाही है, एनआरएचएम कर्मचारियों को आपने वादा क्यों किया था कि नियमितिकरण करेंगे,
सैलरी में वृद्धि करेंगे, समान काम का समान वेतन देंगे, एरियर्स देंगे लेकिन अब जब दो साल के बाद धमका रहे हैं. यह सरकार की तानाशाही है. कांग्रेस पार्टी इसका पूरी तरह से विरोध करती है. यदि सरकार एन एच एम कर्मचारियों के साथ कोई भी अलोकतांत्रिक कदम उठाएगी तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन करेगी.

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यहां ऐसा दिख असर

बिलासपुर में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 13 दिनों से हड़ताल पर बैठे एनएचएम कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा पूर्व सीएम रमन सिंह से मुलाकात न होने पर कर्मचारियों ने नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने एनएचएम कार्यकारी प्रांत अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे को गिरफ्तार कर थाने ले आई गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी सिविल लाइन थाने पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी करते हुए रिहाई की मांग की. जिला अध्यक्ष राजकुमार ने आरोप लगाया कि ज्ञापन देने गई महिला कर्मचारियों से पुलिस ने धक्का-मुक्की की कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अध्यक्ष की रिहाई न होने पर थाने परिसर में ही धरना देंगे खबर लिखे जाने तक बड़ी संख्या में कर्मचारी थाने पर डटे रहे.

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