Chhattisgarh News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने छत्तीसगढ़ के रायपुर, भिलाई और कोरबा में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के संबंध में स्वतः संज्ञान लिया है. न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और ईश्वर सिंह (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने पाया कि भारी सरकारी खर्च के बावजूद इन शहरों में वायु गुणवत्ता मानकों में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है.
अधिकरण ने उल्लेख किया कि पीएम10 स्तर निर्धारित सीमा 60 माइक्रोग्राम/घन मीटर से अधिक है.रायपुर का 75 µg/m³, भिलाई का 69 µg/m³ और कोरबा का 65 µg/m³ है. ये स्तर नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे श्वसन एवं हृदय संबंधी रोगों का जोखिम बढ़ता है.
अधिकरण ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि हालांकि ये शहर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत आते हैं, फिर भी राज्य सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर कोई प्रभावी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) या एयर-शेड आधारित रणनीति अब तक लागू नहीं की है, जो कि सर्वोच्च न्यायालय के आदित्य दुबे बनाम भारत संघ के निर्देशों की भावना के विपरीत है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने एक संयुक्त समिति गठित की है, जिसमें छत्तीसगढ़ के पर्यावरण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल,केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
समिति को दिए ये निर्देश
समिति को निर्देश दिया गया है कि वह प्रभावित शहरों का निरीक्षण करें,छह सप्ताह में तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें और
रायपुर एवं अन्य अधिक जनसंख्या वाले शहरों के लिए GRAP जैसी राज्य-विशिष्ट वायु प्रदूषण प्रतिक्रिया प्रणाली तैयार एवं लागू करें. मामले की अगली सुनवाई 07 अप्रैल 2026 को होगी.
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