Mustard Farming Success Story: छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार (Baloda Bazar) जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सरसों की खेती (Sarson Ki Kheti) एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है. राष्ट्रीय खाद्य तेल एवं ऑयल पाम मिशन योजना के तहत जिले में कम पानी और कम लागत में अधिक लाभ देने वाली सरसों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी कड़ी में जिले के लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 75 से अधिक किसानों ने सरसों की फसल लगाई है, जिससे किसानों को उल्लेखनीय आर्थिक लाभ मिलने लगा है. कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा द्वारा किसानों को निःशुल्क उन्नत किस्म के बीज, संतुलित खाद और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके साथ‑साथ वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का मार्गदर्शन मिलने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार हुआ है. इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर देखने को मिल रहा है.
Success Story: सरसों की खेती
धान की खेती से बढ़ी परेशानी, सरसों बनी विकल्प
बलौदा बाजार जिले के किसान लंबे समय से खरीफ और रबी दोनों ही मौसम में धान की खेती करते आ रहे हैं. हालांकि बीते कुछ वर्षों से भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. रबी मौसम में धान की ज्यादा खेती के कारण पानी की खपत और लागत दोनों बढ़ गई थीं. परिणामस्वरूप किसानों को मुनाफे की जगह नुकसान उठाना पड़ रहा था.
इसी समस्या को देखते हुए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले में धान के रकबे को धीरे‑धीरे कम कर कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की. सरसों की खेती इस रणनीति का अहम हिस्सा बनी, क्योंकि यह फसल कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन देती है और बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है.
Success Story: सरसों के खेत में किसान व अधिकारी
गांव‑गांव तक पहुंची योजना
भाटापारा विकासखंड के ग्राम कलमिडीह, गुर्रा और जांगड़ा में लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 75 से अधिक किसानों को सरसों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इन किसानों को उन्नत प्रजाति के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए हैं. साथ ही खेतों का मृदा परीक्षण कर मिट्टी की उर्वरता के अनुसार पोषक तत्वों की सिफारिश की गई है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को सही समय पर बुआई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, कीट‑रोग नियंत्रण और फसल की निरंतर निगरानी के बारे में भी मार्गदर्शन दे रहे हैं. इससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने का अवसर मिला है और जोखिम भी कम हुआ है.
रकबा बढ़ाने की दिशा में प्रयास
कृषि विज्ञान केंद्र की विषय वस्तु विशेषज्ञ स्वाति ठाकुर मिर्जा ने बताया कि वर्तमान में बलौदा बाजार जिले में रबी फसल के दौरान धान का रकबा 6,000 हेक्टेयर से अधिक है, जबकि सरसों का रकबा लगभग 3,580 हेक्टेयर के आसपास है. उन्होंने कहा कि सरसों के रकबे को बढ़ाने के उद्देश्य से किसानों को समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम से जोड़ा गया है. उनके अनुसार, सरसों की खेती में धान की अपेक्षा पानी, श्रम और लागत कम लगती है, जबकि मुनाफा अपेक्षाकृत अधिक मिलता है. आने वाले समय में किसानों को सरसों से तेल निकालकर सीधे बाजार में विक्रय करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा, जिससे मूल्य संवर्धन के जरिए उनकी आमदनी और बढ़ाई जा सके.
किसानों की जुबानी बदली किस्मत
किसान शिव कुमार टंडन ने बताया कि पहले वे रबी मौसम में धान की खेती करते थे. इस दौरान अधिक लागत और पानी की कमी के कारण अंतिम समय में फसल खराब हो जाती थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ता था. अब शासन के सहयोग और कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में सरसों की खेती करने से पानी की बचत हो रही है और अधिक क्षेत्र में खेती कर बेहतर लाभ मिल रहा है.
वहीं किसान सालिक राम लहरे का कहना है कि सरसों की खेती अपनाने से उनकी आर्थिक स्थिति में स्पष्ट सुधार आया है और भविष्य में वे इसका रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. किसान संतोष दक्षिणाकर ने बताया कि वे कृषि महाविद्यालय में अपनाई जा रही सरसों उत्पादन तकनीक को अपने खेतों में लागू करेंगे, जहां धान कटाई के बाद बचे पैरा को मल्चिंग के रूप में उपयोग कर खरपतवार नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
अनुसंधान और तकनीक से मिल रहा लाभ
कृषि महाविद्यालय भाटापारा के डीन डॉ. एच.एल. सोनबोईर ने बताया कि महाविद्यालय परिसर में सरसों के बीजों पर लगातार अनुसंधान किया जा रहा है. किसानों को उन्नत और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पराली मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए सरसों की खेती की जा रही है. इससे फसल को आवश्यक नमी और पोषण मिल रहा है और उत्पादन क्षमता बढ़ रही है. कुल मिलाकर, बलौदा बाजार जिले में सरसों की खेती किसानों के लिए न केवल एक वैकल्पिक फसल साबित हो रही है, बल्कि यह उनकी आय बढ़ाने और जल संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रही है.
यह भी पढ़ें : Apple Cultivation in MP: विदिशा के किसान का कमाल; शिमला-कश्मीर वाले सेब की खेती से बनाई पहचान
यह भी पढ़ें : Makhana Ki Kheti: अब MP में बिहार की तरह होगी मखाना की खेती; 4 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट लागू
यह भी पढ़ें : UGC New Rules Row: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक, चीफ जस्टिस ने कहा- दुरुपयोग का खतरा
यह भी पढ़ें : दिल्ली के अलावा केवल भोपाल में होती है बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी; इस बार इन बैंड्स की होगी प्रस्तुति