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14 minutes ago

Anti Naxal Operations in India: भारत में नक्सल खात्मे की तारीख नजदीक आ गई है. नक्सलियों के खात्मे के काउंटडाउन में कुछ ही घंटे बचे हैं. केंद्र सरकार ने देशभर से नक्सल को खत्म करने की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन रखी थी. भारत लंबे समय तक नक्सलवाद का बुरा असर पड़ा है. छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे राज्य नक्सल से प्रभावित थे. पिछले दो साल में केंद्र ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई बड़े नक्सलियों को खत्म किया है. साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है. इसके अलावा राज्य सरकारें नक्सलियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नीतियां भी चला रही हैं.

नक्सल के खात्मे की डेडलाइन से एक दिन पहले यानी सोमवार को लोकसभा में इस पर चर्चा की जाएगी. वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होगी.

यहां पढ़ें नक्सल से जुड़ा अपडेट...

Naxal Surrender: सरेंडर करने वालों ने नक्सली नेताओं से भी की हथियार डालने की अपील

Anti Naxal Operation Campaign: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) समेत पूरे देश को 31 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार ने नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य तय क्या है. इस बीच आत्मसमर्पित नक्सलियों ने अपने नेताओं को मुख्य धारा में वापिस लाने के लिए पत्र लिख कर हिंसा छोड़ने की अपील की है. पत्र में संदेश दिया गया है कि अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का वक्त आ चुका है, अब हिंसा छोड़कर अपने परिवार के साथ समय बिताना ही सबसे बेहतर होगा. पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें एक दिन पूर्ण सरेंडर करने वाले नक्सली रेनू, राधिका और संजू ने संयुक्त रूप से अपने साथियों से अपील करते हुए कहा है कि अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का वक्त आ चुका है. अब हिंसा छोड़कर अपने परिवार के साथ समय बिताना ही सबसे बेहतर है. पत्र के माध्यम से अपील करते हुए अपने साथियों के नाम का जिक्र भी किया गया है, जिसमें रूपी चंदर समेत कई नाम शामिल हैं. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Sukma Naxal Encounter: सुकमा में 5 लाख का इनामी नक्सली कमांडर मारा गया

Sukma Encounter Naxalite Moochaki Kailash Killed: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के जंगल-पहाड़ी इलाके में रविवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक इनामी माओवादी को मार गिराया गया. मारा गया नक्सली प्लाटून नंबर-31 का सेक्शन कमांडर और PPCM मूचाकी कैलाश था, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था. सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन को नक्सलियों के 31 मार्च 2026 तक खात्मे की डेडलाइन के तहत अंजाम दिया गया. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

बस्तर में वेंटीलेटर पर माओवाद, साल भर में सिमटा 4 दशकों का उग्रवाद

Maoist Ending in Bastar Chhattisgarh: करीब चार दशकों तक नक्सलवाद और माओवादियों के केंद्र में रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद अब पूरी तरह से वेंटीलेटर पर आ गया है. केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त एंटी नक्सल ऑपरेशन का असर है कि महज एक साल के भीतर पिछले 4 दशकों से फैला माओवादी संगठनों का उग्रवाद सिमट गया है और अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है. दंतेवाड़ा जिले में अब तक 1659 माओवादियों ने आत्म- समर्पण कर मुख्यधारा में जुड़ चुके हैं. वहीं 1720 माओवादियों की गिरफ्तारी की गई. अलग-अलग मुठभेड़ो में कुल 260 माओवादी मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. इन मुठभेड़ में 335 हमारे बहादुर जवानो ने अपनी शहादत दी है, वही 351 आम ग्रामीण नक्सलियों की बर्बरता और क्रुर दंश में मारे गए हैं. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Lok Sabha to Discuss Government Efforts: लोकसभा में आज चर्चा होगी

Amit Shah on Naxal: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को खत्म करने की समय सीमा 31 मार्च रखी है. उससे एक दिन पहले लोकसभा में सोमवार को देश को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होगी. इस चर्चा की शुरुआत तेदेपा सांसद बायरेड्डी शबरी और शिवसेना सदस्य श्रीकांत शिंदे करेंगे. नक्सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों की एक नई समीक्षा के बाद देश में नक्सली उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर सात हो गई है. हाल में केंद्र सरकार द्वारा नौ राज्यों (जिनमें 38 जिले शामिल हैं) के साथ मिलकर एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना की व्यापक समीक्षा की गई. ये राज्य झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल हैं.

Anti Naxal Operation: 2014 में 126 जिले नक्सल से थे प्रभावित

Chhattisgarh Naxal: केंद्र सरकार ने जनवरी 2024 से नक्सल के खिलाफ तेजी से अभियान शुरू किए थे. छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में नक्सल विरोधी अभियानों के तहत सुरक्षाबलों ने कई नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया था. केंद्र ने बताया कि भारत में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 में 126 थी, जो 2025 में घटकर सिर्फ 11 (2025) रह गई. सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या 36 से घटकर सिर्फ 3 रह गई थी. अब 2026 में अब 'लाल आतंक' यानी नक्सलियों का प्रभाव अब इन जिलों में लगभग खत्म हो चुका है.

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