महासमुंद एलपीजी घोटाला: खाद्य अधिकारी ही निकला 1.5 करोड़ के गबन का मास्टरमाइंड

Mahasamusnd LPG Scam: इस पूरे खेल की शुरुआत 23 मार्च को हुई, जब पुलिस विभाग की ओर से जब्त ट्रकों को सुरक्षित रखने के लिए कलेक्ट्रेट को पत्र लिखा गया. जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने इस स्थिति को अवसर में बदलने की योजना बनाई. अजय यादव ने पंकज को इस काम के लिए उपयुक्त एजेंसी और बिचौलिए खोजने की जिम्मेदारी सौंपी. इसके बाद रायपुर के मनीष चौधरी को इस सिंडिकेट में शामिल किया गया.

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महासमुंद एलपीजी घोटाला: खाद्य अधिकारी ही निकला 1.5 करोड़ के गबन का मास्टरमाइंड
Krishnanad Dubey

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है. जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने निजी गैस एजेंसी संचालकों के साथ मिलकर पुलिस द्वारा जब्त किए गए 6 एलपीजी कैप्सूलों से लगभग 92 टन गैस का गबन कर दिया. इस सुनियोजित साजिश में कुल 1.5 करोड़ रुपये की गैस की अफरातफरी की गई, जिसमें से डील की 80 लाख रुपये की रकम आरोपियों के बीच बांटी गई.

इस पूरे खेल की शुरुआत 23 मार्च को हुई, जब पुलिस विभाग की ओर से जब्त ट्रकों को सुरक्षित रखने के लिए कलेक्ट्रेट को पत्र लिखा गया. जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने इस स्थिति को अवसर में बदलने की योजना बनाई. अजय यादव ने पंकज को इस काम के लिए उपयुक्त एजेंसी और बिचौलिए खोजने की जिम्मेदारी सौंपी. इसके बाद रायपुर के मनीष चौधरी को इस सिंडिकेट में शामिल किया गया.

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80 लाख की डील और आधी रात की बैठक

गैस की सही मात्रा का आकलन करने के लिए 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर स्वयं सिंघोड़ा थाना पहुंचे. वहां 6 कैप्सूलों में लगभग 105 मीट्रिक टन गैस की मौजूदगी देख उन्होंने 1 करोड़ रुपये की उगाही का लक्ष्य रखा. कई एजेंसियों से बातचीत के बाद, अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर के साथ 80 लाख रुपये में सौदा पक्का हुआ.

विभागों को गुमराह करने के लिए बुना फर्जीवाड़े का जाल

षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए खाद्य अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को सुपुर्दनामा (handover) दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करने के निर्देश दिए. इसके बाद आपराधिक मंशा से पुलिस को गुमराह किया और फिर कैप्सूलों का वजन नहीं कराया गया. गैस चोरी करने के बाद, खाद्य अधिकारी के कार्यालय में ही वजन का फर्जी पंचनामा तैयार किया गया. चौंकाने वाली बात यह है कि वजन पर्ची कटने से पहले ही पंचनामा कलेक्टोरेट में जमा कर दिया गया था.

किसे कितना पैसा मिला?

80 लाख की इस काली कमाई में बंदरबांट पहले से तय थी. इसके मुताबिक, अजय यादव (खाद्य अधिकारी)के हिस्से में 50 लाख रुपये, पंकज चंद्राकर के हिस्से में 20 लाख रुपये और मनीष चौधरी को 10 लाख रुपये हिस्सा तय किया गया था. वहीं, सुरक्षा के तौर पर 30 लाख रुपये की राशि मनीष चौधरी के खाते में 'Surety' के रूप में जमा कराई गई थी, जिसे नकद भुगतान होने के बाद वापस कर दिया गया.

पुलिस जांच में हुआ चौकाने वाला खुलासा

महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर (CDR) जांच और वैज्ञानिक पूछताछ के माध्यम से इस केस की गुत्थी सुलझाई. विशेषज्ञ रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी कैप्सूल यांत्रिक रूप से फिट थे और गैस रिसाव (leakage) की कोई संभावना नहीं थी. व्यावहारिक रूप से 100 टन गैस का गायब होना, बिना किसी बड़े विस्फोट के संभव नहीं है, जिससे गैस चोरी की पुष्टि हुई.

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गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी

पुलिस ने अब तक इस मामले में पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और अजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है. इसके साथ ही पंकज चंद्राकर के पास से मोबाइल और 13,000 रुपये नकद जब्त की गई है. वहीं, मनीष चौधरी के घर के लिए खरीदे गए 5 लाख से अधिक के होम अप्लायंस और नकदी जब्त की गई. इसके अलावा, अजय कुमार यादव (खाद्य अधिकारी)के पास से नकदी और संदिग्ध दस्तावेज.

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पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(3), 316(5), 61, 238 सहित आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) की धारा 3, 7 के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है.

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