नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन खत्म होने का काउंडाउन शुरू हो गया है. जैसे-जैसे 31 मार्च का नजदीक आ रही है, जंगलों में बचे माओवादियों के आत्मसमर्पण को लेकर कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं. कांकेर के जंगलों में अब महज 17 नक्सली शेष बताए जा रहे हैं, जिनमें डीवीसीएम चंदर और एसीएम रूपी प्रमुख हैं. दोनों के अपनी टीम के साथ आत्मसमर्पण की अफवाहें बीते एक हफ्ते से उड़ रही हैं, लेकिन अब तक उन्होंने सरेंडर नहीं किया है.
इस बीच, एक दिन पूर्व आत्मसमर्पण करने वाले तीन नक्सलियों ने अपने साथी रूपी, चंदर और अन्य नक्सलियों के लिए भावुक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपने साथियों से वापसी की अपील की है. पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है. इसमें हाल ही में सरेंडर करने वाले नक्सली रेनू, राधिका और संजू ने संयुक्त रूप से अपने साथियों से अपील करते हुए कहा है कि अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का समय आ चुका है. हिंसा छोड़कर अपने परिवार के साथ समय बिताना ही सबसे बेहतर है.
पत्र में रूपी और चंदर का नाम
उन्होंने पत्र में अपने साथियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें रूपी, चंदर समेत कई नाम शामिल हैं. सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने पत्र में परतापुर थाना प्रभारी का मोबाइल नंबर भी लिखा है और संपर्क कर सुरक्षित लौटने की गुहार लगाई है.
कंपनी नंबर 5 के कुछ माओवादी जंगल
बता दें कि कांकेर में सक्रिय सभी नक्सल कमेटियां खत्म हो चुकी हैं. सिर्फ कंपनी नंबर 5 के कुछ माओवादी जंगल में अब भी भटक रहे हैं. बस्तर आईजी ने दो दिन पहले ही बयान जारी करते हुए शेष बचे नक्सलियों को 72 घंटे के भीतर सरेंडर करने या अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी.
नक्सली छोटे-छोटे समूहों में बंटे
सूत्रों के अनुसार, कांकेर के जंगलों में बचे नक्सली छोटे-छोटे समूहों में बंट गए हैं, जिसके कारण उनसे संपर्क साधने में पत्रकारों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन में अब सिर्फ 2 दिन शेष हैं. ऐसे में संभावना है कि यदि जल्द नक्सली आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो पुलिस बड़ा ऑपरेशन लॉन्च कर सकती है.