मंदिर में तोड़फोड़ से आगजनी तक…, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश, जानिए गरियाबंद हिंसा की इनसाइड स्टोरी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र में मंदिर में तोड़फोड़ से शुरू हुआ विवाद हिंसा और आगजनी तक पहुंच गया. दुतकैया (खपरी) गांव की घटना को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं.

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Gariaband Violence Case Inquiry: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हुई हिंसा की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है. राजिम थाना क्षेत्र के ग्राम दुतकैया (खपरी) में से शुरू हुआ विवाद अब आगजनी और हिंसा तक पहुंच गया. हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आया है. जिला कलेक्टर एवं दंडाधिकारी ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं. अब 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह हिंसा कैसे और किन वजहों से भड़की?

कलेक्टर ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

गरियाबंद कलेक्टर ने इस घटना को बेहद संवेदनशील मानते हुए दंडाधिकारी जांच (Magisterial Inquiry) कराने के निर्देश दिए हैं. आदेश के अनुसार, राजिम के अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) विशाल महाराणा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्हें 15 दिनों के भीतर पूरी घटना की विस्तृत और बिंदुवार रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

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15 दिन में मांगी गई पूरी रिपोर्ट

जांच में यह देखा जाएगा कि हिंसा के पीछे असली कारण क्या थे, इसमें कौन‑कौन लोग जिम्मेदार हैं और कितना संपत्ति नुकसान हुआ है. साथ ही यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा कि क्या प्रशासन को पहले से किसी तरह की चेतावनी या सूचना मिली थी और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई.

फिलहाल गांव में तैनात पुलिस बल

घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन का दावा है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है. किसी भी तरह की नई घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

विवाद की जड़: एक साल पुरानी घटना

इस पूरे विवाद की जड़ करीब एक साल पहले की घटना से जुड़ी बताई जा रही है. ग्रामीणों के अनुसार गांव के एक पुराने और प्रतिष्ठित शिव मंदिर में तीन युवकों आरिफ, सलीम और इमरान ने शिवलिंग में तोड़फोड़ की थी. उस समय तीनों आरोपी नाबालिग थे, जिसके चलते उन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया था.

सुधार गृह से लौटे, लेकिन हालात और बिगड़े

ग्रामीणों का आरोप है कि बाल सुधार गृह से लौटने के बाद इन युवकों के व्यवहार में सुधार की बजाय आक्रामकता आ गई. गांव वालों का कहना है कि ये युवक लगातार लोगों को धमकाते थे और हथियार दिखाकर डराने की घटनाएं भी सामने आई थीं. इससे गांव में लंबे समय से अंदर ही अंदर तनाव बना हुआ था.

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1 फरवरी को भड़की हिंसा

1 फरवरी को यह तनाव हिंसा में बदल गया. आरोप है कि इन्हीं तीनों युवकों ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर गांव के ही 4‑5 युवकों पर अचानक हमला कर दिया. इस हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. इसके बाद गांव में गुस्सा भड़क उठा.

ग्रामीणों का आक्रोश और आगजनी

अपने ही गांव के युवकों पर हुए हमले और पुरानी रंजिश के चलते सैकड़ों ग्रामीण उग्र हो गए. आक्रोशित भीड़ ने तीनों आरोपियों के घरों के साथ‑साथ उनके समुदाय के अन्य लोगों के घरों को भी निशाना बनाया. कई घरों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिससे गांव का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया.

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अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

कलेक्टर द्वारा आदेशित मजिस्ट्रियल जांच अब यह तय करेगी कि प्रशासन की चूक कहां हुई और क्या इस हिंसा को पहले ही रोका जा सकता था. 15 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट पर न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी.