Dantewada Water Crisis: दंतेवाड़ा में चल रहे रेलवे दोहरीकरण कार्य ने अब ग्रामीणों के सामने गंभीर जल संकट खड़ा कर दिया है. भांसी क्षेत्र में रेलवे ब्रिज निर्माण के दौरान ठेकेदार कंपनी द्वारा नाले की खुदाई किए जाने से पानी पूरी तरह मटमैला और लाल हो गया है. हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. दूषित पानी से जहां मवेशी बीमार पड़ रहे हैं, वहीं खेतों की सिंचाई भी प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों ने काम रोकने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.
मिट्टी और मलबा मिलने से पानी दूषित
दरअसल, Indian Railways द्वारा जिले में रेलवे दोहरीकरण का कार्य किया जा रहा है. इसी कड़ी में भांसी के पास बन रहे रेलवे ब्रिज के नीचे बहने वाले नाले को भारी मशीनों से खोद दिया गया. खुदाई के दौरान निकली मिट्टी और मलबा सीधे नाले के पानी में मिल गया, जिससे साफ बहने वाला पानी अब लाल और गंदा नजर आ रहा है.
पालतू पशु बीमार
यह नाला भांसी, पोरोकमेली और कमेली गांव के लोगों के लिए जीवनरेखा जैसा है. ग्रामीण इसी पानी का उपयोग पीने, नहाने, कपड़े धोने और घरेलू कार्यों में करते हैं. खेतों की सिंचाई भी इसी स्रोत से होती है. पानी दूषित होने से फसल प्रभावित हो रही है और पालतू पशु भी बीमार पड़ने लगे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि बिना वैकल्पिक जल व्यवस्था किए नाले को नुकसान पहुंचाया गया है.
ग्रामीण विशाल मरकाम ने बताया, 'पहले हम लोग इसी नाले का साफ पानी पीते थे, लेकिन अब पानी पूरी तरह लाल और गंदा हो गया है. मवेशी भी यही पानी पी रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं. जब तक साफ पानी की व्यवस्था नहीं होती, काम बंद होना चाहिए.'
परेशान ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीण कमलु तेलाम ने बताया कि रेलवे के ठेकेदारों से बात की गई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है. गांव के लोग परेशान हैं. अगर जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो हम आंदोलन करेंगे.
ग्रामीण महिला ने बताया कि घर के काम से लेकर बच्चों के पीने तक के लिए यही पानी इस्तेमाल होता था. अब पानी गंदा हो गया है, हमें दूर से पानी लाना पड़ रहा है. सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए.
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द वैकल्पिक जल व्यवस्था नहीं की गई और नाले की सफाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.
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