CBI अधिकारी बनकर करते थे करोड़ों की वसूली, अब 'साहब' इस तरह पहुंचे सलाखों के पीछे

Cyber Frauds in India: दुर्ग पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर एक महिला से लगभग 41 लाख रुपये की ठगी की. इतना ही नहीं, इस गिरोह ने ठगी से प्राप्त रकम को क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से दुबई भेजने की भी साजिश रची थी.

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Online Fraud Cyber Crime Report: दुर्ग पुलिस और एंटी साइबर क्राइम यूनिट की संयुक्त टीम ने दो ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को सीबीआई अफसर बता कर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे. दरअसल, थाना सिटी कोतवाली दुर्ग पुलिस और एंटी साइबर क्राइम यूनिट (एसीसीयू) की संयुक्त कार्रवाई में एक संगठित और अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह खुद को सीबीआई और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर आम नागरिकों को झांसे में लेकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था.

इस मामले में दुर्ग पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर एक महिला से लगभग 41 लाख रुपये की ठगी की. इतना ही नहीं, इस गिरोह ने ठगी से प्राप्त रकम को क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से दुबई भेजने की भी साजिश रची थी. गिरोह का नेटवर्क गुजरात, दिल्ली और दुबई तक फैला हुआ था.

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ऐसे हुआ खुलासा

दुर्ग जिले के बघेरा के  हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी पीड़ित फरिहा अमीन कुरैशी ने 5 फरवरी 2025 को थाना कोतवाली दुर्ग में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि उनके पास एक वीडियो कॉल आया था. इस दौरान उन लोगों ने डरा धमका कर अपने खाते में 41 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए थे, लेकिन जब पीड़िता ने दोबारा उसे फोन किया और फोन नहीं लगा तो उसे ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी स्थानीय थाने को दी.

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ऐसे दिया वारदात को अंजाम

पीड़िता ने बताया कि 21 जनवरी 2025 को सुबह 10:35 बजे उनके मोबाइल पर एक वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाला खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर सीबीआई इन्वेस्टिगेशन का हवाला देते हुए जानकारी देने लगा. कॉल पर मौजूद व्यक्ति ने बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग और आईडेंटिटी थेफ्ट जैसे गंभीर आरोपों की जांच चल रही है. आरोप लगाया गया कि उनके नाम से एक एचडीएफसी बैंक खाता दिल्ली में मौजूद है, जिसमें लगभग 8.7 करोड़ रुपये जमा है. इसके बाद पीड़िता से उनका व्यक्तिगत डेटा लिया गया और यह कहा गया कि यदि वह तुरंत दिल्ली आकर बयान नहीं देती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. डर के कारण पीड़िता ने ऑनलाइन बयान देने की सहमति दी. इसके बाद उन्हें कथित आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम (फर्जी नाम) से वीडियो कॉल कर जोड़ दिया गया, जिन्होंने पूछताछ करते हुए उन्हें उनके बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से लगभग 41 लाख रुपये विभिन्न चरणों में आरबीआई में जमा कराने को कहा.उन्होंने ये भरोसा दिलाया गया कि जांच में सब कुछ ठीक पाए जाने पर ये पैसे आपको वापस कर दिए जाएंगे. जब 4 फरवरी 2025 तक दिल्ली पुलिस के कथित अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया, तब पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ, तब जाकर उसने थाना कोतवाली दुर्ग में शिकायत दर्ज करवाई.

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ऐसे आरोपी तक पहुंची साइबर पुलिस

जांच के दौरान साइबर सेल भिलाई ने पता लगाया कि पीड़िता की ओर से 29 जनवरी 2025 को भेजे गए ₹9,50,000 की राशि राजकोट नागरिक सहकारी बैंक, मोरबी शाखा (गुजरात) के एक खाते में ट्रांसफर हुई थी. यह खाता “आस्था लॉजिस्टिक” नामक संस्था के नाम पर संचालित था, जिसके संचालक मनीष दोसी (46 निवासी मोरबी, गुजरात) हैं. आरोपी मनीष दोसी को विधिवत गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने बताया कि उसके साथी गुजरात के ही सुरेन्द्रनगर निवासी अशरफ खान ने यह रकम अपने खाते में डलवाई थी. इसके बाद साइबर पुलिस ने आरोपी अशरफ को गिरफ्तार कर उसके मोबाइल की जांच की. इस दौरान उसके मोबाइल में क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित ऐप्स और चैट्स बरामद हुए, जिससे यह पुष्टि हुई कि ठगी से प्राप्त धनराशि को क्रिप्टो में बदलकर दुबई भेजा जा रहा था.

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आरोपी ने यह भी बताया कि पैसा ठगी के कुछ ही घंटों के भीतर स्थानीय “अंगड़िया” के माध्यम से हवाला चैनल में डाला जाता था और फिर वहां से इसे दूसरे जालसाजों तक पहुंचा दिया जाता था. आरोपियों के कब्जे से रुपये गिनने की मशीन, एक इनोवा फोर्ड एंडेवर वाहन, क्रमांक GJ 13 AR 2422, मोबाइल फोन और बैंक के कई कागजात भी जब्त किए गए है.

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