खुले में कुर्बानी न करें... छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने बकरीद से पहले जारी की 5 पॉइंट की एडवाइजरी 

Bakrid 2026: बकरीद (ईद-उल-अज़हा) के त्योहार से पहले छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने 5 पॉइंट की एडवाइजरी जारी की है. इसमें खुले में कुर्बानी नहीं करने समेत अन्य सलाह दी गई हैं. जानिए, डॉ. सलीम ने क्या कहा?

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Eid ul Adha 2026: ईद-उल-अज़हा का त्योहार 28 मई 2026 गुरुवार को मनाया जाएगा. छत्तीसगढ़ में ईद-उल-अज़हा की नमाज़ सुबह 06:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक प्रदेश की विभिन्न मस्जिदों, ईदगाहों में निर्धारित समय अनुसार अदा की जाएगी. मुस्लिम धर्म के लोग यह त्योहार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की याद में मनाते हैं, इस दौरान मुस्लिम समाज के साहिबे निसाब व्यक्ति द्वारा कुर्बानी की जाती है. इस बार यह कुर्बानी 28 मई को सूर्योदय से लेकर 30 मई सूर्यास्त तक होगी. छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने लोगों खुले में कुर्बानी नहीं देने की अपील की है, उन्होंने कहा कि समाज के लोग अन्य धर्मों की आस्था का भी ध्यान रखें.  

उन्होंने कहा- पैगम्बर साहब ने भी हमें संदेश दिया है कि हम जिस देश में रहते हैं वहां के संविधान का हमें आदर करना चाहिए, हमारे आस-पास में निवास करने वाले हमारे भाइयों की आस्था का आदर करना चाहिए, जिससे समाज में आपसी भाईचारा, अमन कायम रहे. इस्लाम धर्म, कुरआन व हदीस भी हमें सभी धर्मों के प्रति आस्था, आपसी भाईचारा, मोहब्बत और साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हैं. कई बार यह देखा जाता है कि, कुछ लोगों द्वारा कुर्बानी खुले क्षेत्र में की जाती है या कुर्बानी करते समय बनाए गए वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है, जिससे हमारे बहुसंख्यक भाइयों को तकलीफ होती है, इससे समाज का वातावरण दूषित होता है.

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छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष की 5 बड़ी अपील  

  1. आप ईद-उल-अज़हा के मौके पर खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी बिल्कुल न करें. 
  2. प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न करें, कुर्बानी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया में वायरल न करें. 
  3. कुर्बानी का खून नालियों में न बहाएं, अपशिष्ट पदार्थ व खून गड्ढा खोदकर दफनाएं. 
  4. कुर्बानी के बाद साफ-सफाई का ध्यान रखें, रोड में नमाज अदा न करें, जमात ज्यादा होने पर पूर्व वर्षों की भांति शिफ्टों (पाली) में ईद की नमाज़ की व्यवस्था करें.
  5. समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा कायम रख कर सभी समाज की आस्था का आदर करते हुए ईद-उल-अज़हा के त्योहार को मनाएं.

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