VIDEO: दिल्ली के कर्तव्य पथ पर दिखा छत्तीसगढ़ का शौर्य, शान से निकली देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झांकी

77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया. “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित इस झांकी में देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय, वीर गुंडाधुर और वीर नारायण सिंह की शौर्यगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर उतरी छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों ने झांकी को उत्सुकता के साथ देखा और तालियां बजाकर सराहना की. दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छत्तीसगढ़ की झांकी का स्वागत किया. झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया.

झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है. इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था.

भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया

झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया. धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित किया. विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया. विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे.

Advertisement

No Vote, No Road: वोट नहीं तो रोड़ नहीं... देवास में यह सच हो गया, सरपंच यशोदा ने सड़क बनवाई, बीच में एक घर छोड़ा, देखें तस्वीरें  

शहीद वीर नारायण सिंह घोड़े पर सवार

झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया. उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई. पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया.

Advertisement

विश्व चैंपियन क्रांति गौड़ के घर डबल खुशियां, Thar खरीदी, पिता ने ज्वॉइन की पुलिस की नौकरी, सपना यह लग्जरी कार लेने का

जिला बदला, पर जिंदगी नहीं; जानिए जंगल में 'कैद' सोनहरी की कहानी