छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: एसीबी और EOW ने अनवर को किया गिरफ्तार, कोर्ट ने पुलिस रिमांड पर भेजा

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में एसीबी और ईओडब्ल्यू ने अनवर ढे़बर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड मिला. जांच में CSMCL के जरिए मैनपावर/प्लेसमेंट एजेंसियों पर ओवरटाइम भत्ते के नाम पर ₹100 करोड़ से अधिक के भुगतान में अनियमितताएं उजागर हुईं.

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Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है. एसीबी (Anti Corruption Bureau) और ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) ने आरोपी अनवर ढे़बर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. आरोप है कि मैनपावर/प्लेसमेंट एजेंसियों के ज़रिए ओवरटाइम (अधिसमय) भत्ते के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान कराया गया, लेकिन यह रकम कर्मचारियों तक पहुंची ही नहीं, बल्कि कमीशन के रूप में बांटी गई.

एसीबी–EOW की संयुक्त कार्रवाई

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 44/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7B, 8 और धारा 120B (आपराधिक साज़िश), भा.द.वि. में प्रकरण पंजीबद्ध है. इसी मामले में सोमवार को अनवर ढे़बर की गिरफ्तारी की गई और आगे की पूछताछ के लिए रिमांड लिया गया.

ईडी की सूचना के बाद दर्ज हुआ मामला

29 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर ने तीन व्यक्तियों से ₹28.80 लाख नकद ज़ब्त किए जाने की सूचना राज्य सरकार को भेजी थी. इसी आधार पर एसीबी/ईओडब्ल्यू ने प्रथम सूचना पत्र (FIR) दर्ज कर जांच शुरू की. जांच में वित्तीय लेन–देन और लाभार्थियों की कड़ी तलाश की गई.

जांच में कैसे खुला घोटाला?

विवेचना के दौरान सामने आया कि CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) में मैनपावर/प्लेसमेंट एजेंसियों के ज़रिए ओवरटाइम/अधिसमय भत्ते के नाम पर बड़े पैमाने पर भुगतान कराए गए. एजेंसियों के बिलों में दर्शाए गए भत्ते की राशि एजेंसी को दी जाती थी, जिसे आगे कर्मचारियों तक पहुंचना चाहिए था, लेकिन व्यवहार में राशि कर्मचारियों को न जाकर कमीशन के रूप में निकाली और बांटी जाती रही.

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₹100 करोड़ से अधिक का भुगतान 

जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम-अधिसमय भत्ते के नाम पर लगभग ₹100 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया. नियमों के मुताबिक यह रकम शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों की देय थी, लेकिन एजेंसियों के माध्यम से इसे वास्तविक लाभार्थियों तक न पहुंचा कर अवैध कमीशन के रूप में बांट दिया गया.

सरकारी राजस्व को सीधे नुकसान

यह पूरी प्रक्रिया शासन के आबकारी राजस्व से रकम निकालकर उसे अनधिकृत लाभ के रूप में बांटने जैसी बताई गई है. इससे सरकार को प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति पहुँची. केस डायरी में यह पैटर्न, बिलिंग, भुगतान प्रवाह और लाभार्थियों के बीच संबंधों के आधार पर दर्ज किया गया है.

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कमीशन की अंतिम डिलीवरी 

विवेचना में यह भी स्थापित हुआ कि कमीशन की राशि अंततः आरोपी अनवर ढे़बर तक पहुंचाई जाती थी. इसी आधार पर एसीबी–ईओडब्ल्यू ने उन्हें गिरफ्तार कर 23.02.2026 को माननीय विशेष न्यायालय में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड स्वीकृत हुआ. एजेंसियां अब मनी ट्रेल, अकाउंट्स और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ आगे बढ़ा रही हैं.