छत्तीसगढ़ में Z+ और Z सुरक्षा पर सियासत क्यों? यह कितने नेताओं के पास, नक्सल मुक्त भारत के ऐलान से पहले गरमाया मुद्दा 

नक्सल मुक्त भारत के ऐलान से पहले छत्तीसगढ़ के नेताओं को मिली सख्त सुरक्षा पर कांग्रेस ने सवाल उठा दिए हैं. उनका कहना है कि अगर, नक्सली खत्म हो गए हैं तो सुरक्षा क्यों नहीं हटाई जा रही है. प्रदेश के 60 नेताओं और उनके परिवार Z+ और Z सुरक्षा घेरे में हैं.

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माओवाद खत्म होने की ओर है, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की है. लेकिन, नक्सल मुक्त भारत के ऐलान से  पहले छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई. कांग्रेस का कहना है कि अगर, नक्सली खत्म हो गए हैं तो फिर नेताओं की Z+ और Z सुरक्षा क्यों नहीं हटाई जा रही है. जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक लोगों को नहीं लगेगा कि नक्सली खत्म हो गए हैं. 

कितने नेताओं को मिली कौंन की सुरक्षा? 

प्रदेश के नेताओं की सुरक्षा की बात करें तो 13 बड़े जनप्रतिनिध ऐसे हैं जिन्हें Z+ सुरक्षा मिली है, इनमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सीएम विष्णु देव साय, पूर्व सीएम भूपेश बघेल समेत 13 वीआईपी शामिल हैं. इसके अलावा बस्तर के भी 9 जनप्रतिनिधि Z+ सुरक्षा घेरे में हैं. 38 जनप्रतिनिधियों और उनके परिवार को Z सुरक्षा मिली हुई है. 35 जनप्रतिनिधि Y प्लस सुरक्षा घेरे में हैं. 121 जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को X श्रेणी की सुरक्षा मिली है.

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अब जानिए कांग्रेस ने क्या कहा? 

कांग्रेस मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि अगर, माओवाद खत्म हो गया है तो जनप्रतिनिधियों की Z प्लस सुरक्षा कब कम होगी. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खासकर बस्तर के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में हजारों जवान क्यों तैनात हैं. जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा खत्म होगी, तभी लोगों को लगेगा कि माओवाद सच में खत्म हो गया है. बता दें कि बस्तर नक्सलवाद से सबसे प्रभावित जिला माना जाता है, जहां माओवादी संगठन के टॉप लीडरशिप या तो मारे गए हैं, या फिर उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है. 

किस श्रेणी की सुरक्षा में कितने जवान होते हैं तैनात? 

Z+ और Z श्रेणी की सुरक्षा का स्तर खतरे के आकलन के आधार पर तय किया जाता है. Z+ सुरक्षा में लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्य पुलिस के जवान शामिल होते हैं. Z सुरक्षा में करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. Y प्लस श्रेणी में 11 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का घेरा रहता है, जबकि X श्रेणी में केवल 2 सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात होते हैं.

भाजपा ने किया पलटवार 

कांग्रेस के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को माओवाद के खात्मे पर सवाल उठाने की जगह जश्न मनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस माओवाद के खात्मे पर कांग्रेस को संशय था, वह अब खत्म होने की ओर है. यही जनमानस की मंशा रही है. आने वाले समय नेताओं की सुरक्षा भी कम की जाएगी.