छत्तीसगढ़ में पीलिया का प्रकोप! 56 लोग निकले पॉजिटिव, अब पेयजल की जांच शुरू

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पीलिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जहां मरीजों की संख्या 56 तक पहुंच चुकी है. प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और पेयजल पाइपलाइनों की जांच शुरू हो गई है. माइक्रोबायोलॉजी विभाग की रिपोर्ट में सप्लाई पानी में बैक्टीरियल लोड मानक से अधिक पाया गया है.

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Chhattisgarh Jaundice Outbreak: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में पीलिया के बढ़ते मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में 42 लोग पॉजिटिव पाए जाने के बाद अब संख्या बढ़कर 56 तक पहुंचने की बात सामने आ रही है. हालात बिगड़ते देख प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं और पेयजल की पाइपलाइनों की जांच शुरू कर दी गई है. डर के माहौल में कई लोग अब बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं.

प्रकोप से हड़कंप, प्रशासन अलर्ट

अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में पीलिया फैलने की सूचना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया. प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है और लोगों की जांच के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं. निगम कमिश्नर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का निरीक्षण किया. स्थानीय लोगों ने बताया कि बीमारी की खबर के बाद वे काफी डरे हुए हैं और एहतियात के तौर पर अब पीने का पानी बाजार से खरीद रहे हैं.

इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

मोमीनपुरा, नवागढ़ और महामाया पारा में पीलिया के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पाजिटिव मरीजों की संख्या 42 से बढ़कर 56 तक पहुंच गई है. कई मरीजों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नवागढ़ में चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लक्षणों की जांच कर रही हैं और ज़रूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल भेजा जा रहा है.

दूषित पेयजल के कारण फैली बीमारी 

प्रारंभिक जांच में पीलिया फैलने का मुख्य कारण दूषित पेयजल माना जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए नियम (PHED/जलापूर्ति) विभाग ने सप्लाई पाइपलाइनों की जांच शुरू की है. पानी की सप्लाई के स्रोत और लाइन कनेक्शनों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि कहीं से सीवेज या गंदे पानी की मिलावट का पता चल सके.

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लैब रिपोर्ट में बढ़ा बैक्टीरियल लोड

राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंह देव मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हॉस्पिटल इन्फेक्शन रिपोर्ट में सप्लाई नलों से लिए गए पानी के नमूनों में मानक से अधिक बैक्टीरियल लोड पाया गया है. रिपोर्ट इशारा करती है कि कई जगह पानी फीकल कंटैमिनेशन (मल-मिश्रण) से प्रभावित हो सकता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. 

निरीक्षण और तात्कालिक कदम

निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्वच्छता, क्लोरीनेशन और पानी की क्वालिटी जांच के निर्देश दिए हैं. कई जगहों पर टैंकरों से सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने और हैंडपंप/नलों पर क्लोरीन टैबलेट के इस्तेमाल की व्यवस्था की जा रही है. लोगों को उबला हुआ पानी पीने और हाथ धोने जैसी सावधानियों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है.

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