छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने रेडियो के जरिए नक्सलियों को सार्वजनिक संदेश जारी किया है. उन्होंने बताया कि उड़ीसा-छत्तीसगढ़ सीमा से सक्रिय माओवादियों की ओर से उन्हें पत्र मिला है, जिसमें सुरक्षा की गारंटी के साथ आत्मसमर्पण की घोषणा रेडियो पर करने का अनुरोध किया गया था.
विजय शर्मा ने कहा कि सीपीआई माओवादी संगठन के बीबीएम डिवीजन, बालांगीर, बरगढ़ और महासमुंद क्षेत्र के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के सचिव ‘विकास' ने पत्र भेजकर 2 और 3 मार्च तक अपने साथियों के साथ वापस आने की इच्छा जताई है. उन्होंने 15 साथियों से अपील की कि वे तय तारीख पर मुख्यधारा में लौट आएं, सरकार उनकी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
‘आत्मसमर्पण नहीं, ससम्मान पुनर्वास'
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ‘आत्मसमर्पण' शब्द का प्रयोग नहीं करती, बल्कि इसे ‘ससम्मान पुनर्वास' मानती है. उन्होंने कहा कि पुनर्वास केंद्र जेल की तरह बंद व्यवस्था नहीं है, बल्कि खुला केंद्र है जहां आने-जाने की स्वतंत्रता, स्वास्थ्य परीक्षण, खेलकूद और कौशल विकास की सुविधा उपलब्ध है.
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक जंगल में रहने के कारण कई नक्सलियों के दस्तावेज, बैंक खाते और अन्य प्रक्रियाएं अधूरी होती हैं, जिन्हें पूरा करने में 3-4 महीने का समय लगता है. गांवों की स्थिति सामान्य होने के बाद ही उन्हें सुरक्षित घर भेजा जाता है.
केस वापसी और जेल से पुनर्वास पर भी काम
विजय शर्मा ने बताया कि सरकार ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया है, जो मामलों की समीक्षा कर रही है कि किन प्रकरणों को वापस लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जैसे जंगल से पुनर्वास संभव है, वैसे ही जेल से भी पुनर्वास की कानूनी प्रक्रिया पर काम जारी है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो संविधान के दायरे में काम करना चाहते हैं, उन्हें किसी तरह की रोक नहीं है. हथियार छोड़कर समाज और संविधान से जुड़ना ही मुख्य शर्त है.
फायरिंग की घटना पर स्पष्टीकरण
एमएमसी पर कथित फायरिंग के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ थी, न कि आत्मसमर्पण की घोषणा के बाद की कार्रवाई. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इससे पहले 210 लोगों और बाद में कांकेर में 21 लोगों के पुनर्वास के दौरान किसी तरह की फायरिंग नहीं हुई.
अमित शाह और मुख्यमंत्री का भी संदेश
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट कहा है कि जो मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका “लाल कालीन बिछाकर स्वागत” किया जाएगा. वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी भरोसा दिलाया है कि पुनर्वासित लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और खेती-बाड़ी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.
31 मार्च 2026 की डेडलाइन
सरकार ने दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य तय किया गया है. विजय शर्मा ने नक्सलियों से अपील की कि 2 और 3 मार्च को निर्धारित तिथि पर संपर्क कर मुख्यधारा में लौट आएं. उन्होंने कहा कि पूर्व की तरह बस की व्यवस्था कर सुरक्षित स्थान तक लाया जाएगा. हथियार साथ लाने और डंप की जानकारी देने की भी अपील की गई है.
नक्सलियों के पत्र में क्या लिखा?
नक्सलियों की ओर से भेजे गए पत्र में कई अहम बातें कही गई हैं.
1. हथियारों सहित लौटने की घोषणा
पत्र में लिखा गया है कि CPI (माओवादी) के BBM डिविजन (बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद) के 15 सदस्य हथियारों सहित मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं. इनमें 14 छत्तीसगढ़ और 1 तेलंगाना का सदस्य बताया गया है.
2. 2-3 मार्च तक आने की बात
पत्र में कहा गया है कि रेडियो पर सुरक्षा की गारंटी मिलने के बाद वे 2 और 3 मार्च तक बाहर आएंगे. पूरी प्रक्रिया में लगभग एक सप्ताह लगने की बात कही गई है.
3. तीन प्रमुख मांगें
नक्सलियों ने सरकार से तीन घोषणाएं करने की अपील की है.
सशस्त्र संघर्ष छोड़कर संविधान पर विश्वास जताने पर माओवादी पार्टी को राजनीतिक दल की मान्यता.
माओवादियों पर दर्ज पुलिस मामलों को रद्द कर जेल में बंद लोगों की रिहाई.
भारतीय संविधान के दायरे में खुलकर काम करने की अनुमति.
पत्र में दावा किया गया है कि यदि ये तीन घोषणाएं होती हैं तो “पूरी पार्टी” मुख्यधारा में लौट सकती है.
4. सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
पत्र में यह भी पूछा गया है कि
आत्मसमर्पण करने वालों को सीधे घर क्यों नहीं भेजा जाता?
क्या बाद में फिर केस लगाकर जेल-कचहरी में फंसाया जाएगा?
मीडिया में आत्मसमर्पण की घोषणा के बाद भी MMC पर फायरिंग क्यों हुई?
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में चल रहे सर्च ऑपरेशन कुछ दिन रोकने की मांग भी की गई है.