छत्तीसगढ़ में पंचायती राज उपचुनाव 2026 की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. कोरबा जिले में 1 जून 2026 को पंच, सरपंच, जनपद सदस्य और पार्षद की कुल 11 रिक्त सीटों पर मतदान होना है. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, लेकिन इन सबके बीच जिले की बिंझरा जनपद सीट इस वक्त पूरे प्रदेश में सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा और विवाद का केंद्र बन चुकी है. वजह बेहद चौंकाने वाली है. जिस जनपद सदस्य की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, अब उसी की खाली हुई कुर्सी पर कब्जा करने के लिए हत्या का मुख्य आरोपी चुनावी मैदान में उतर गया है.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा घटनाक्रम कटघोरा थाना अंतर्गत आने वाले केसलपुर क्षेत्र का है. पिछले साल, 23 दिसंबर 2025 को भाजपा नेता और बिंझरा के तत्कालीन जनपद सदस्य अक्षय गर्ग की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की मुख्य वजह चुनावी रंजिश को माना गया था. पुलिस ने इस मामले में मल्दा निवासी मुस्ताक अहमद को मुख्य आरोपी बनाया था. मुस्ताक अहमद जेल में बंद है. अब ट्विस्ट यह आया है कि मुख्य आरोपी मुस्ताक अहमद ने संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का लाभ उठाते हुए इसी बिंझरा जनपद सीट से सदस्य पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है.

छत्तीसगढ़ उपचुनाव 2026: BJP नेता की हत्या कर उनकी सीट से चुनावी मैदान में उतरा जेल में बंद मुस्ताक
गली-मोहल्लों से लेकर होटलों तक सिर्फ इसी की चर्चा
चुनावी मैदान में आरोपी की इस एंट्री ने बिंझरा क्षेत्र के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. चाय के टपरों, सब्जी दुकानों, होटलों और चौपालों पर सिर्फ इसी मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है. इस सीट पर मुस्ताक अहमद समेत कुल 8 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
स्थानीय जनता का कहना है कि बिंझरा क्षेत्र आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. जनता को एक ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो उनके सुख-दुख में खड़ा रहे और विकास कार्य कराए, लेकिन इस आपराधिक और राजनीतिक घालमेल ने उन्हें भी सोचने पर मजबूर कर दिया है.
इंसाफ की लड़ाई बनाम सत्ता की होड़
एक तरफ जहां दिवंगत भाजपा नेता अक्षय गर्ग का परिवार आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है और इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ हत्या का आरोपी उसी रसूखदार कुर्सी को हथियाने की पुरजोर तैयारी में जुटा है. यह घटनाक्रम अब सिर्फ एक आम उपचुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसने छत्तीसगढ़ की राजनीति और हमारे चुनावी सिस्टम पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. क्या गंभीर आरोपों के बीच भी सत्ता की यह लड़ाई जायज है? बहरहाल, 1 जून को होने वाले इस मतदान पर अब पूरे छत्तीसगढ़ की नजरें टिकी हुई हैं और इस वीआईपी बन चुकी सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण हो गया है.
नानक सिंह राजपूत की रिपोर्ट