कांग्रेस जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण हुआ पूरा, अब सदन से सड़क तक सांय सरकार को इन मुद्दों से घेरेगी पार्टी

 छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जिला अध्यक्षों का 10 दिवसीय महा प्रशिक्षण शिविर संपन्न हो गया है. राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल जैसे दिग्गजों से मिली ट्रेनिंग के बाद अब कांग्रेस साल 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए 'सदन से सड़क तक' आंदोलन का चक्रव्यूह तैयार कर चुकी है. जानिए क्या है कांग्रेस का नया गेम प्लान और भाजपा ने इस पर कैसे पलटवार किया है.

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10 दिन की ट्रेनिंग के बाद 'सड़क पर उतरने' को तैयार कांग्रेस
Neelesh Tripathi

Chhattisgarh Congress District Presidents Training: छत्तीसगढ़ की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव 2028 (Chhattisgarh Assembly Election 2028 )को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है. कांग्रेस के नवनियुक्त 41 जिला अध्यक्षों का 10 दिनों का गहन प्रशिक्षण शिविर अब खत्म हो चुका है. आलाकमान से मिले कड़े दिशानिर्देशों और चुनावी गुरुमंत्र के बाद पार्टी ने संगठन को धार देने और साय सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है. वहीं, सत्ताधारी दल भाजपा भी कांग्रेस के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अपनी जवाबी रणनीति पर काम शुरू कर दी है.

रायपुर के अभनपुर में आयोजित इस 10 दिवसीय शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने शिरकत की. राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा जैसे दिग्गजों ने जिला अध्यक्षों को सीधे तौर पर ट्रेनिंग दी. इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ कांग्रेस को फिर से आक्रामक रुख में वापस लाना है. पार्टी ने तय किया है कि अब वे सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे.

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बूथ मजबूत करने और जनता से सीधे जुड़ने की रणनीति

इस सीक्रेट और महत्वपूर्ण शिविर में इस बात पर सबसे ज्यादा मंथन हुआ कि हार के दौर से गुजर रही पार्टी को बूथ स्तर पर कैसे जिंदा किया जाए. लिहाजा, ये रणनीति बनाई गई कि हर जिले में जनता से सीधा संवाद बढ़ाया जाएगा और सरकार की कमियों को उजागर कर एक प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाई जाएगी. यानी संकेत साफ है कि 2028 के चुनाव के लिए जो ब्लूप्रिंट तैयार हुआ है, उसके तहत भाजपा सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरने की तैयारी है.

बैज ने की जनता की लड़ाई लड़ने की घाणा

इस प्रशिक्षण शिविर पर प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस दीपक बैज  ने कहा है कि 10 दिन का प्रशिक्षण नए जिला अध्यक्षों को दिया गया और आगे की रणनीति बनाई गई. अब कांग्रेस एकजुट होकर सरकार की जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ काम करेगी. आज राज्य की जनता महंगाई, बिजली के बढ़े बिल, खराब कानून व्यवस्था और दमनकारी नीतियों से त्रस्त है. कांग्रेस इन मुद्दों पर जनता के साथ खड़ी है और उनके हक की लड़ाई लड़ेगी.

इन 7 बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस

कांग्रेस ने आने वाले दिनों के लिए अपने तरकश के तीर साफ कर दिए हैं. पार्टी अब जिन प्रमुख मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी. उनमें किसान और युवाओं का मुद्दा सबसे ऊपर है. इसके तहत धान के मुद्दे और युवाओं की बेरोजगारी के मुद्दे को उठाया जाएगा. इसके साथ ही महिला सुरक्षा व कानून व्यवस्था के मुद्दे को भी कांग्रेस प्रमुखता से उठाएगी. इसके तहत प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर सरकार को घेरेगी. साथ ही महंगाई और स्थानीय मुद्दे को भी कांग्रेस हवा देने जा रही है. इसके तहत बिजली बिलों में बढ़ोतरी और हर जिले की अपनी स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए संघर्ष करेंगी. इसके लिए हर जिले में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू किया जा रहा है.

 "ट्रेनिंग देने वाले खुद नैया डूबा चुके हैं"

कांग्रेस के इस आक्रामक प्लान पर सत्ताधारी दल भाजपा ने बेहद तीखा और तंज भरा हमला किया है. भाजपा का मानना है कि इस ट्रेनिंग से जमीन पर कोई बदलाव नहीं होने वाला. कांग्रेस की इस ट्रेनिंग पर छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने पलटवार किया है.  उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण वर्ग सिर्फ गांधी परिवार के प्रति आस्थावान सैनिक तैयार करने के लिए था. उन्होंने राहुल गांधी और उनकी टीम पर तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद हार का अर्धशतक लगा चुके हैं, या जो भूपेश बघेल भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड बना चुके हैं या अनर्गल बयान देकर मैदान छोड़ने वाले पवन खेड़ा हों या कांग्रेस की नैया डूबा चुके सचिन पायलट, इन प्रशिक्षकों को देखकर ही कोई भी बता सकता है कि इस प्रशिक्षण वर्ग में अंदर क्या खिचड़ी पकी होगी.

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10 दिन की लंबी कसरत के बाद कांग्रेस का चुनावी ब्लूप्रिंट तो कागजों पर तैयार दिख रहा है, लेकिन असली चुनौती यह होगी कि क्या नए जिला अध्यक्ष इस रणनीति को छत्तीसगढ़ के सुदूर गांवों और बूथों तक अमली जामा पहना पाते हैं या नहीं. दूसरी तरफ, देखना यह भी दिलचस्प होगा कि भाजपा कांग्रेस के इस 'सड़क से सदन तक' वाले घेराव का जवाब किस राजनीतिक चाल से देती है.

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