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Census 2026: पहले ₹1 करोड़ का बीमा कराओ, वरना इस चिलचिलाती गर्मी में नहीं होगा जनगणना का काम !

Census news: छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के अनुसार, मई की इस झुलसा देने वाली गर्मी में फील्ड वर्क करना जानलेवा साबित हो सकता है. शिक्षकों का कहना है कि डेटा संग्रह के लिए उन्हें घंटों पैदल चलना होगा, जिससे लू लगने और गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा बना रहेगा. संघ ने मांग की है कि या तो जनगणना के समय में बदलाव किया जाए या इस कार्य के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए.

Census 2026: पहले ₹1 करोड़ का बीमा कराओ, वरना इस चिलचिलाती गर्मी में नहीं होगा जनगणना का काम !
छत्तीसगढ़ में जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक पहले शिक्षकों और शासन के बीच तनातनी की स्थिति बन गई है.
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Census 2026: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में जनगणना (Census ) के दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक पहले शिक्षकों और शासन के बीच तनातनी की स्थिति बन गई है. प्रदेश में जारी भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच शिक्षकों ने जनगणना कार्य में अपनी ड्यूटी लगाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है. शिक्षक संघ का तर्क है कि जब शासन खुद आम जनता के लिए गर्मी से बचाव की एडवाइजरी जारी कर रहा है, तो ऐसी स्थिति में शिक्षकों को तपती धूप में घर-घर भेजना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

दरअसल, राज्य में वर्तमान में पारा 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है. छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के अनुसार, मई की इस झुलसा देने वाली गर्मी में फील्ड वर्क करना जानलेवा साबित हो सकता है. शिक्षकों का कहना है कि डेटा संग्रह के लिए उन्हें घंटों पैदल चलना होगा, जिससे लू लगने और गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा बना रहेगा. संघ ने मांग की है कि या तो जनगणना के समय में बदलाव किया जाए या इस कार्य के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए.

 ₹1 करोड़ का बीमा और सुरक्षा की भी मांग

विरोध के स्वर बुलंद करते हुए शिक्षक संघ ने केवल समय बदलने की ही मांग नहीं की है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी मांग शासन के सामने रखी है. संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इस चुनौतीपूर्ण मौसम में शिक्षकों से जनगणना कार्य कराया जाता है, तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में संबंधित शिक्षक के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के बीमा का प्रावधान होना चाहिए.

शिक्षा मंत्री ने दिया सेवा शर्तों का हवाला

शिक्षकों की इस आपत्ति और मांगों पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की नियुक्ति की सेवा शर्तों में राष्ट्रीय कार्यों के प्रति उनकी जवाबदेही पहले से शामिल है. शासन का मानना है कि जनगणना एक अनिवार्य और राष्ट्रीय हित का विषय है, जिसे समय सीमा के भीतर पूरा करना आवश्यक है. मंत्री ने संकेत दिए हैं कि सेवा शर्तों के तहत शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही संभव नहीं है.

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छत्तीसगढ़ में 16 अप्रैल से 'सेल्फ गणना' की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन एक मई से जमीनी स्तर पर घर-घर जाकर सर्वे का काम शुरू होना है. जनगणना विभाग और प्रशासन इसे देश के भविष्य के लिए अनिवार्य मान रहे हैं, वहीं, शिक्षक इसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील कर रहे हैं. हालांकि, शिक्षा विभाग ने यह स्वीकार किया है कि गर्मी एक वास्तविक चिंता है, लेकिन अब यह देखना होगा कि शासन शिक्षकों को राहत देने के लिए कार्य के घंटों में कोई बदलाव करता है या नहीं. 

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