ऐतिहासिक बूढ़ा सागर तालाब बना कचरा घर, 6 साल बाद भी अधूरा पड़ा है एसटीपी प्लांट का काम

Rajnandgaon News: बूढ़ा सागर के किनारे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण लगभग 6 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन अभी तक यह प्लांट पूर्ण नहीं हो पाया है.

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Budha Sagar Pond: राजनांदगांव शहर में राजाओं के जमाने का बूढ़ा सागर तालाब अब दूषित हो चुका है. शहर का गंदा पानी या कहे नालियों का पानी सीधे इस तालाब में मिल रहा है, जिसके कारण राजाओं के जमाने यह तालाब पूरी तरीके से दूषित हो गया है. वहीं पानी से बदबू भी आ रही है, जिसके चलते इस तालाब में रह रहे मछलियां और अन्य जीव जंतु पर भी खतरा मंडरा रहा है. एसटीपी प्लांट अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, जिसके कारण लोगों को भी सुविधा नहीं मिल रही है.

6 साल बाद भी अधूरा पड़ा है एसटीपी प्लांट का काम

राजनांदगांव नगर निगम द्वारा शहर के गुरु नानक चौक के पास बूढ़ा सागर के किनारे एसटीपी प्लांट (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण लगभग 6 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन अभी तक यह प्लांट पूर्ण नहीं हो पाया है. जिसके कारण लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है. दूषित पानी तालाब में न जाए और पानी को फिल्टर किया जाए इसके लिअ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण अभी तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है.

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अब हो रही जांच

रानी सागर बूढ़ा सागर सौंदर्यीकरण के तहत इसका निर्माण कार्य किया जा रहा है. हालांकि अब इसकी जांच चल रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बूढ़ा सागर हमारी धरोहर है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण शहर का गंदा पानी इसमें जा रहा है. पिछले पंचवर्षीय में एसटीपी प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया था. जिसमें फिल्टर होकर पानी जाना था. वह प्रोजेक्ट पूरी तरीके से फेल हो चुका है. उसे चालू किया गया था, लेकिन वह पूरा नहीं हो पाया और आज आधा अधूरा पड़ा हुआ है. इस पर ध्यान देना चाहिए, जिससे हमारी धरोहर बच सकें.

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जीव जंतुओं के लिए खतरा

स्थानीय नागरिक का कहना है कि कांग्रेस सरकार में एसटीपी प्रोजेक्ट लाया गया था, लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है. यह बूढ़ा सागर तालाब ऐतिहासिक धरोहर है, जिसमें कई जीव जंतु रहते हैं जिससे अब बदबू आ रही है, जिसके कारण जीव जंतु मर रहे हैं.

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नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने कहा कि बूढ़ा सागर में जो एसटीपी निर्माणाधीन था. उसमें हमें सैद्धांतिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है, इसलिए वह रुका हुआ है. हम लोगों ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है. नाली का पानी है जो बूढ़ा सागर में जाता है, उसमें मोटर लगाकर पानी को डायवर्ट किया गया है.

इस तालाब का उपयोग पूर्व में निस्तार के लिए किया जाता था, लेकिन पूरी तरीके से पानी दूषित होने के कारण इस तालाब का उपयोग निस्तार के लिए नहीं हो पा रहा है. नगर निगम की लापरवाही के चलते शहर का यह ऐतिहासिक तालाब पूरी तरीके से दूषित हो गया है और शहर के नालियों का पानी इसमें मिल रहा है. वैकल्पिक व्यवस्था की बात कही जा रही है. दूषित पानी को रोकने के लिए इसमें एसटीपी प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन पिछले 6 सालों में भी काम पूरा नहीं हो पाया है और यह काम अब पूरी तरीके से बंद पड़ा हुआ है.

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