एक बार लगाएं, 4 साल तक हर 3 महीने में फसल काटकर कमाएं लाखों, ब्राम्ही वरदान से कम नहीं; फायदे भी गजब

Brahmi Farming: ब्राम्ही एक ऐसी औषधीय फसल है, जिसका उपयोग स्मरण शक्ति (याददाश्त) बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने, मस्तिष्क संबंधी औषधियों और सौंदर्य उत्पादों को बनाने में किया जाता है. इस कारण बाजारा में इसकी डिमांड बनी रहती है. छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड किसानों को ब्राम्ही रोपण सामग्री निःशुल्क उपलब्ध करा रहा है.

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Brahmi Cultivation Turns Profitable for Farmers

Brahmi Farming Profitable for Farmers: एक बार रोपण करें और तीन से चार साल तक हर तीन महीने फसल की कटाई कर मुनाफा कमाएं. अरे चौंकिए मत ब्राम्ही एक ऐसा ही औषधीय पौधा है, जिसकी कटाई हर तीन महीने में होती है. इसका उपयोग आयुर्वेद में किया जाता है. यह याददाश्त बढ़ाने और मानसिक शांति के लिए काफी कारगर औषधीय है. इस कारण बाजार में इसकी डिमांड भी ज्यादा है. छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड इसकी पैदावर के लिए किसानों को प्रोत्साहित भी कर रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए Buy Back यानी सीधी खरीदी की सुविधा भी मिल रही है. 

धान के साथ ब्राम्ही को अपना रहे किसान 

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के प्रयासों से प्रदेश के किसान धान की खेती के साथ-साथ अब ब्राम्ही को भी अपना रहे हैं. रायपुर और  धमतरी जिले के करीब 36 किसान 15 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं. ब्राम्ही की खेती छत्तीसगढ़ की जलवायु और भूमि के उपयुक्त है, यह नमी और जलभराव वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उग जाती है.   

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21 हजार खर्च, कमाई लाख में  

जानकारों के अनुसार, ब्राम्ही की खेती में एक एकड़ में सालाना करीब 21 हजार रुपये की लागत आती है. एक साल में करीब 30 क्विंटल तक उत्पादन होता है, जिससे किसानों को लगभग 1.50 लाख रुपये तक की आय होती है. सारा खर्चा निकालने के बाद करीब 1 लाख 20 हजार रुपये का सीधा लाभ होता है.  

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किस काम आती है ब्राम्ही?

ब्राम्ही एक ऐसी औषधीय फसल है, जिसका उपयोग स्मरण शक्ति (याददाश्त) बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने, मस्तिष्क संबंधी औषधियों और सौंदर्य उत्पादों को बनाने में किया जाता है. इस कारण बाजारा में इसकी डिमांड बनी रहती है. 

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बोर्ड द्वारा फ्री दी जा रही सामग्री 

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम के अनुसार, किसानों को ब्राम्ही की रोपण सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी प्रारंभिक लागत और कम हो गई है. किसानों की उपज बेचने में कोई समस्या न आए इसके लिए बोर्ड द्वारा पहले से अनुबंध किए हैं. जिस कारण उनकी फसल आसानी से बिक जाती है. 

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