Biranpur Violence News: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बिरनपुर मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. करीब तीन वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने पिता-पुत्र रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 17 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया. इस फैसले के साथ अप्रैल 2023 की उस घटना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय कानूनी रूप से समाप्त हो गया, जिसने पूरे प्रदेश में व्यापक तनाव पैदा कर दिया था.
गौरतलब है कि 8 अप्रैल 2023 को बेमेतरा जिले के बिरनपुर में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस दौरान वर्तमान में साजा के विधायक ईश्वर साहू के पुत्र भुनेश्वर साहू की हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया था. कई घरों में आगजनी की घटनाएं हुईं और प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन हुए. राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से बंद और आंदोलन की घोषणाओं के बाद हालात और गंभीर हो गए थे.
दो दिन बाद मिला पिता-पुत्र का शव
हिंसा के दो दिन बाद कोरवाय गांव के एक खेत में बकरी चराने गए रहीम मोहम्मद और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद के शव बरामद हुए थे. इस दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया था. मामले की जांच के दौरान कई धाराओं में अलग अलग एफआईआर दर्ज की गई. कुल सात प्रकरण बनाए गए थे, जिनमें आगजनी, हमले और हत्या से जुड़े आरोप शामिल थे.
आरोपियों ने सुनाया अपना पक्ष
दोषमुक्त होने के बाद बाहर आए कुछ युवाओं ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा. कुछ ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे अपराध कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया. इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. आरोपियों का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद उनके परिवारों को सामाजिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कुछ ने दावा किया कि रिश्ते टूट गए और समाज में अलग नजर से देखा जाने लगा. लिहाजा, अब बरी हुए आरोपियों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
जांच और न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले में पहले आगजनी से जुड़े प्रकरण में भी कुछ आरोपियों को राहत मिल चुकी थी. अब डबल मर्डर केस में 17 लोगों के बरी होने के बाद जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे.
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बिरनपुर कांड ने जिस तरह प्रदेश की कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित किया था, वह आज भी चर्चा का विषय है. कोर्ट के फैसले के बाद अब यह देखना होगा कि आगे किसी स्तर पर इस मामले में अपील या नई कानूनी पहल होती है या नहीं.
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