बिलासपुर ट्रेन हादसा: मसीहा बनकर आए सोनू बघेल और उसके दोस्‍त, मौत के बीच बचाईं कई जानें

Bilaspur Train Accident 2025 में जब चारों ओर अफरा-तफरी थी, तब ढेका गांव के युवाओं ने इंसानियत की मिसाल पेश की. MEMU Train Accident के बाद इन युवाओं ने घायलों को बचाया, सोशल मीडिया के ज़रिए जानकारी पहुंचाई और कई लोगों की जान बचाई. हादसे में 11 की मौत हुई, जबकि जांच में Signal Overshoot की बात सामने आई.

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में 4 नवंबर 2025 को गेवरा रोड–बिलासपुर मार्ग पर एक भीषण रेल हादसा हुआ, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और कई यात्री घायल हो गए. यह दर्दनाक दुर्घटना तब हुई जब एक पैसेंजर ट्रेन (MEMU) आगे खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई. हादसे की भयावहता देखकर आसपास के लोग सहम गए, लेकिन इसी बीच ग्राम ढेका के कुछ युवाओं ने इंसानियत और बहादुरी की ऐसी मिसाल पेश की जिसने सबका दिल जीत लिया.

हादसे के तुरंत बाद ग्राम ढेका के सोनू बघेल, अपने साथियों कमलेश पात्रे, सोदान पात्रे, भैरव निषाद, जितेंद्र गेन्दले और संतोष के साथ बिना किसी डर के मौके पर पहुंचे. वहां उन्होंने देखा कि टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर चुके थे और यात्री अंदर फंसे हुए थे. चारों ओर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मची थी. 

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इन युवाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना बचाव कार्य शुरू किया. उन्होंने घायल यात्रियों को बाहर निकाला और पास से गुजर रहे वाहनों की मदद से उन्हें अस्पताल भिजवाया. हादसे के दौरान उन्हें एक दो साल का बच्चा भी मलबे में फंसा मिला, जिसके पेट में लोहे का टुकड़ा धंसा हुआ था. युवाओं ने उसे निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन उपकरण न होने के कारण बचाव दल के आने तक इंतज़ार करना पड़ा. बाद में बच्चे को रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला, हालांकि उसकी हालत गंभीर बताई गई.

सोनू बघेल और उनके साथियों ने न केवल घायलों को बचाया, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से फोटो और वीडियो साझा कर परिजनों को जानकारी भी पहुंचाई. इससे कई परिवारों को राहत मिली और बचाव दल को घायलों की पहचान में मदद मिली. जब तक बिलासपुर प्रशासन और रेलवे की टीमें मौके पर पहुंचीं, तब तक इन युवाओं ने कई लोगों की जान बचा ली थी. स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों ने इन युवाओं को “रेल हादसे के असली हीरो” बताया और उनकी सराहना की.

बिलासपुर रेल हादसा 2025: कब, कहां, कैसे हुआ?

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में 4 नवंबर 2025 की शाम करीब चार बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ. जब MEMU पैसेंजर ट्रेन आगे खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई. टक्कर इतनी भीषण थी कि मालगाड़ी का गार्ड केबिन MEMU ट्रेन के इंजन में घुस गया, और ट्रेन का पहला डिब्बा मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया. हादसे में 11 यात्रियों की मौत और कई घायल हो गए.

शुरुआती जांच में सामने आया है कि MEMU ट्रेन ने सिग्नल ओवरशूट किया, यानी सिग्नल तोड़कर आगे बढ़ गई. अब रेलवे की जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि यह हादसा मानवीय गलती की वजह से हुआ या सिग्नलिंग सिस्टम की तकनीकी खराबी के कारण.

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