श्रवण सूर्यवंशी कस्टोडियल डेथ: SC के आदेश पर CBI ने दर्ज की हत्या की FIR, परिजनों को 25 लाख का अंतरिम मुआवजा 

सीबीआई यह पता लगाएगी कि श्रवण सूर्यवंशी के सिर में चोट कब और कैसे लगी, उसकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार था? न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद क्‍या कार्रवाई में किसी ने लापरवाही की.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Bilaspur shrawan suryavanshi custodial death case cbi registers murder fir.

बिलासपुर में श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत में हुई मौत के मामले में सीबीआई ने हत्या की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सीबीआई ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद की है. सीबीआई ने सिविल लाइंस थाने में 30 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर को अपनी जांच का आधार बनाया है. एफआईआर में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है. 

सुनवाई के दौरान  सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को यह जांच करने के निर्देश दिए हैं कि श्रवण की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट या हिंसा की गई थी. कोर्ट ने सीबीआई को 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.

Advertisement

17 को पुलिस ने हिरासत में लिया, 22 को जनवरी को मौत

ग्राम मोहरा निवासी 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी खेती-किसानी करता था. परिजनों के मुताबिक पुलिस उसे 17 जनवरी 2024 को अपने साथ लेकर गई थी. पुलिस ने 18 जनवरी को उसे 6 लीटर महुआ शराब के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया. आबकारी एक्ट के मामले में 19 जनवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. जेल पहुंचने के बाद श्रवण की तबीयत बिगड़ गई. 21 जनवरी को पहले उसका इलाज जेल अस्पताल में किया गया और हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई.

सिर में लगी चोट मौत का कारण 

मामले की न्यायिक जांच में श्रवण की मौत को लेकर गंभीर सवाल सामने आए थे. 22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट में पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और एफएसएल रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई थी. रिपोर्ट में उसके शरीर में किसी तरह का जहर नहीं मिलने की बात सामने आई थी. मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, सिर में लगी चोट के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट हुआ और इसी को मौत का मुख्य कारण माना गया.

मौत की जानकारी मिली 

श्रवण की पत्नी लहराबाई ने जांच में बताया था कि सीपत थाने की पुलिस श्रवण को अपने साथ लेकर गई थी. बाद में परिवार को पता चला कि उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां अगले दिन उसकी मौत हो गई. वहीं, पिता अमृतलाल ने भी पुलिस द्वारा बेटे को ले जाने और बाद में उसकी मौत की जानकारी मिलने की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 15 अगस्त को सीबीआई की चार सदस्यीय टीम बिलासपुर पहुंची थी. टीम ने सिविल लाइंस थाने से केस डायरी और अन्य दस्तावेज जब्त किए. इसके बाद टीम ने सेंट्रल जेल पहुंचकर जेल अधीक्षक और कर्मचारियों से भी विस्तृत जानकारी जुटाई.  

25 लाख के मआवजे के आदेश 

मृतक श्रवण के पक्ष के याचिकाकर्ता वकील परांकुश मिश्रा ने बताया कि अब सीबीआई यह पता लगाएगी कि श्रवण के सिर में चोट कब और कैसे लगी, उसकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार था और न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई में किसी अधिकारी ने लापरवाही तो नहीं की. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को श्रवण के परिजनों को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने के भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं.

Advertisement