मंत्री के क्षेत्र में आंगनबाड़ी बंद; ज़मीनी हकीकत ने खोली पोल, महीने में दो चार दिन ही खुलते हैं केंद्र

Anganwadi Centers Closed: सूरजपुर के मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र महीने में सिर्फ 2–4 दिन खुल रहे हैं. NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में व्यवस्था की पोल खुली.

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सूरजपुर में मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली

Anganwadi Centers NDTV Ground Report: छत्तीसगढ़ में सूरजपुर जिले के दूरस्थ गांवों से जो तस्वीर सामने आई है, वह सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है. ये तस्वीर न सिर्फ बच्चों की शिक्षा और पोषण से जुड़े अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ाती है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और माताओं के हक को लेकर भी व्यवस्था की पोल खोलती है. महिला एवं बाल विकास मंत्री के ही विधानसभा क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली सामने आई है. NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई आंगनबाड़ी केंद्र महीनों में सिर्फ दो से चार दिन ही खुल पा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में गुस्सा और निराशा दोनों है.

दूरस्थ गांव में NDTV की पड़ताल

सरकारी दावों की हकीकत जानने जब NDTV की टीम सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड स्थित कर्री गांव पहुंची, तो वहां हालात चौंकाने वाले मिले. गांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत देखकर टीम भी हैरान रह गई. जिस समय बच्चों और महिलाओं को सेवाएं मिलनी चाहिए थीं, उस वक्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके थे.

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मंत्री के क्षेत्र में ही लापरवाही

दरअसल कर्री गांव जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित है और यह महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विधानसभा क्षेत्र भटगांव के अंतर्गत आता है. गांव के दो आंगनबाड़ी केंद्र पटेलपारा और मझारीपारा पूरी तरह अव्यवस्था की भेंट चढ़े हुए हैं. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि दोनों केंद्र महीने में महज दो से चार दिन ही खुलते हैं, जबकि बाकी दिनों में ताले जड़े रहते हैं.

Anganwadi Centers Closed: मंत्री के क्षेत्र में बंद आंगनबाड़ी

पढ़ाई और पोषण दोनों पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि जब कभी कभार केंद्र खुलते भी हैं, तो बच्चों को न तो नियमित पढ़ाई मिलती है और न ही तय मानकों के अनुसार गतिविधियां कराई जाती हैं. इसका सीधा असर गांव के नौनिहालों की बुनियादी शिक्षा पर पड़ रहा है. साथ ही गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे कुपोषण का खतरा बढ़ता जा रहा है.

सरपंच ने जताई नाराजगी

ग्राम पंचायत कर्री के सरपंच राम सिंह मरकाम ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही बताया है. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद रहने की जानकारी मिलना बेहद चिंताजनक है. इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी. सरपंच का कहना है कि बच्चों और माताओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

विभागीय अधिकारी का पक्ष

वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शुभम बंसल ने इस पूरे मामले में समय का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से गर्मी के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 7 बजे से 11 बजे तक किया जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर किसी केंद्र के महीने में सिर्फ कुछ ही दिन खुलने की शिकायत सही पाई जाती है, तो इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.

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बड़े सवाल खड़े करती यह स्थिति

बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जिम्मेदार मंत्री के क्षेत्र में ही इस कदर लापरवाही देखने को मिल रही है, तो प्रदेश के दूर-दराज के अन्य गांवों की स्थिति क्या होगी. आखिर कब तक बच्चों का भविष्य और माताओं के अधिकार यूं ही ताले में बंद रहेंगे, और कब इस व्यवस्था में जवाबदेही तय होगी? यह सवाल अब पूरे सिस्टम पर खड़ा हो चुका है.

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