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बर्ड फ्लू का प्रकोप: बिलासपुर में 4400 मुर्गियों की मौत से सनसनी, 10 किमी का इलाका बना सर्विलांस जोन

Bird Flu Chickens Death: बिलासपुर में एक सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू से मुर्गियों की मौत हो गई थी. इसके बाद प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है. कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने आज देर रात बर्ड फ्लू से प्रभावित कोनी क्षेत्र का संयुक्त दौरा कर स्थिति का जायजा लिया.

बर्ड फ्लू का प्रकोप: बिलासपुर में 4400 मुर्गियों की मौत से सनसनी, 10 किमी का इलाका बना सर्विलांस जोन

Bird Flu Outbreak in Bilaspur: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोनी स्थित कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां अचानक करीब 4400 मुर्गियों की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. अब बुधवार देर रात बर्ड फ्लू से मुर्गियों के मरने की पुष्टि हो गई है. इसके बाद अधिकारियों ने 10 किलोमीटर के दायरे में निगरानी तेज कर दी है. इतनी बड़ी संख्या में एक साथ मुर्गियों की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ जीएस तंवर ने मंगलवार को बताया कि 19 से 24 मार्च के बीच कोनी इलाके में स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में वायरल संक्रमण के कारण लगभग 4,400 मुर्गियों की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि इस फार्म में कुल 5,037 मुर्गियां थीं. विभाग ने सोमवार को मृत मुर्गियों के सैंपल जांच के लिए भोपाल और पुणे भेजे थे, जहां से उनमें बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंज़ा) की पुष्टि हुई थी.

10 किमी के दायरे में निगरानी होगी

प्रशासन ने कहा कि फार्म के एक किलोमीटर के दायरे को 'संक्रमित क्षेत्र' और 10 किलोमीटर के दायरे को 'निगरानी क्षेत्र' घोषित किया गया है. प्रोटोकॉल के अनुसार, 'संक्रमित क्षेत्र' के भीतर मुर्गियों, उनके चारे और अंडों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनके आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा पोल्ट्री पक्षियों के मालिकों को मुआवज़ा दिया जाएगा. मुर्गियों को मारने (culling) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फ़ार्म को सील कर दिया जाएगा.

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कलेक्टर ने दिए जरूरी निर्देश

वहीं, कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि संक्रमण को फैलने से रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें. कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित होने के बाद आवागमन पर नियंत्रण रखा जाए. साथ ही संक्रमित पोल्ट्री एवं पक्षियों के सैंपलिंग, किलिंग (कुलिंग) एवं सुरक्षित निपटान की प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित की जाए.

आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ाते हुए सघन निगरानी रखने के निर्देश दिए. स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच करें. पशुपालन विभाग को पोल्ट्री फार्मों की निगरानी और आवश्यक प्रतिबंध लागू करने के लिए कहा है.

उठे कई बड़े सवाल

इस घटना ने पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर यह बीमारी का असर है या किसी स्तर पर हुई बड़ी चूक इसका जवाब अब जांच रिपोर्ट ही देगी. फिलहाल पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है.

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