UPSC Result 2025 Yashwardhan Singh Success Story: मेहनत, धैर्य और सतत प्रयास किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की सबसे बड़ी ताकत होते हैं. सतना जिले के परसवारा गांव में जन्मे किसान के बेटे यशवर्धन सिंह (Yashwardhan Singh Success Story) ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए 212वीं रैंक प्राप्त की है. उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है.
पिता हैं किसान
यशवर्धन सिंह एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता नरेंद्र सिंह खेती-किसानी करते हैं, जबकि माता संगीता सिंह गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा यशवर्धन की पढ़ाई और सपनों को पूरा करने में उनका साथ दिया. आज उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती.
दो बार इंटरव्यू तक तय किया सफर
यशवर्धन की छोटी बहन यशिता सिंह ने बताया कि उनके भाई का लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का था. उन्होंने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की. शुरुआत में उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा दी, लेकिन इंटरव्यू चरण में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में भी दो बार इंटरव्यू तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया.
तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता
हालांकि इन असफलताओं ने यशवर्धन का हौसला नहीं तोड़ा. उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ फिर से प्रयास किया. वर्ष 2025 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कीं और इस बार इंटरव्यू की बाधा भी पार कर ली. आखिरकार तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए 212वीं रैंक प्राप्त की.
बीटेक की पढ़ाई की
यशवर्धन की प्रारंभिक शिक्षा अमरकंटक स्थित कल्याणिका केन्द्र से हुई. इसके बाद उन्होंने भोपाल के एनआरआई कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की. सिविल सेवा की तैयारी के लिए उन्होंने दिल्ली की प्रसिद्ध दृष्टि आईएएस अकादमी से कोचिंग भी ली. उनकी सफलता से परिजनों, मित्रों और गांव के लोगों में खासा उत्साह है.
यशवर्धन सिंह ने सतना का नाम किया रोशन
ग्रामीणों का कहना है कि किसान परिवार के बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है. फिलहाल उनकी अंतिम सेवा और कैडर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन उनकी उपलब्धि ने कई युवाओं को प्रेरणा देने का काम जरूर किया है.
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