उज्जैन जिले में इस साल अपेक्षा से कम बारिश होने के कारण लोगों की चिंता बढ़ी हुई है. इसी बीच अच्छी वर्षा और जनकल्याण की कामना को लेकर भोम प्रदोष के अवसर पर हाटकेश्वर महादेव मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया. सुबह से शाम तक चले इस आयोजन में भगवान शिव का 31 प्रकार की औषधियों और विभिन्न पवित्र रसों से महाअभिषेक किया गया तथा सहस्त्रधारा अर्पित की. श्रद्धालुओं और पुरोहितों ने भगवान शिव से जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की.
शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट...
भोम प्रदोष पर हुआ विशेष अनुष्ठान
हाटकेश्वर मंदिर में आयोजित यह विशेष अनुष्ठान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 7 बजे तक चलता रहा. पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा. वैदिक मंत्रों और शिव स्तुति के बीच भगवान शिव का विशेष अभिषेक किया. आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए और पूजा-अर्चना कर अच्छी वर्षा की कामना की.
75 से अधिक पुरोहितों ने किया अभिषेक
अनुष्ठान में 75 से अधिक पुरोहितों और पंडितों ने भाग लिया. सभी ने वैदिक विधि-विधान से भगवान शिव का महाअभिषेक कराया. अभिषेक के लिए शतावरी, नागरमोथा सहित 31 प्रकार की औषधियों का उपयोग किया. आयोजकों ने बताया कि कुछ दुर्लभ और विशेष औषधियां हिमालय क्षेत्र से भी मंगाई गई थीं, जिनका धार्मिक महत्व माना जाता है.
सुबह और शाम दो चरणों में हुई सहस्त्रधारा
पंडित कविंद्र भारद्वाज के अनुसार सावन मास के दौरान हाटकेश्वर मंदिर में प्रतिदिन महा रुद्र अभिषेक किया जाता है. इसी परंपरा के तहत हर वर्ष एक दिन विशेष सहस्त्रधारा का आयोजन होता है. इस बार भोम प्रदोष के अवसर पर सुबह और शाम दो अलग-अलग चरणों में भगवान शिव का अभिषेक किया गया. दोनों सत्रों में 31 औषधियों का प्रयोग कर सहस्त्रधारा अर्पित की.
समुद्रफेन का भी हुआ विशेष उपयोग
अभिषेक के दौरान समुद्रफेन का भी उपयोग किया गया, जिसे धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व प्राप्त है. इसके अलावा विभिन्न औषधियों और पवित्र द्रव्यों को भगवान शिव को अर्पित किया. श्रद्धालुओं ने देश और प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि तथा अच्छी वर्षा की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की.
10 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
समाजसेवी महेश परियानी ने बताया कि हाटकेश्वर मंदिर में सावन के पूरे 30 दिनों तक प्रतिदिन सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक महा रुद्र अभिषेक किया जाता है. पिछले लगभग 10 वर्षों से सावन में एक दिन विशेष सहस्त्रधारा की परंपरा भी निभाई जा रही है. इस बार जिले में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया.
श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और रुद्राक्ष वितरण
विशेष अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया. मंदिर पहुंचने वाले भक्तों को प्रसाद के साथ रुद्राक्ष की मालाएं भी वितरित की गईं. आयोजकों ने बताया कि भगवान हाटकेश्वर महादेव से उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश, सर्वकल्याण और विकास की प्रार्थना की.