शिवपुरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान मंगलवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई. अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे 70 वर्षीय बुजुर्ग ने आवेदन तो जमा कर दिया, लेकिन अपनी बारी आने से पहले ही जिंदगी की लड़ाई हार गए. टोकन हाथ में लिए वह अधिकारियों से मिलने का इंतजार कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई. इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों और अधिकारियों के बीच शोक और सन्नाटे का माहौल छा गया.
जनसुनवाई में शिकायत लेकर पहुंचे थे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान बदरवास तहसील के ग्राम सडबूड़ निवासी 70 वर्षीय बादल सिंह यादव के रूप में हुई है. बादल सिंह अपनी किसी समस्या या मांग को लेकर जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे थे. उन्हें उम्मीद थी कि अधिकारियों के सामने अपनी बात रखेंगे और उनकी समस्या का समाधान होगा.
आवेदन जमा कर मिला था 32वां टोकन
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद बादल सिंह यादव ने अपना आवेदन जमा कराया और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद उन्हें 32 नंबर का टोकन दिया गया. टोकन मिलने के बाद वह अपनी बारी आने का इंतजार करने लगे. आवेदन जमा करने के बाद बादल सिंह एडीएम कार्यालय के बाहर रखी बेंच पर बैठ गए. वहां वह शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. कुछ समय बाद आसपास मौजूद लोगों ने देखा कि वह बेंच पर अचेत अवस्था में पड़े हुए हैं. यह देखकर मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया.
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई सांसें
घटना की जानकारी मिलते ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया. डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. बुजुर्ग की अचानक मौत की खबर मिलते ही परिजनों और वहां मौजूद लोगों में शोक की लहर दौड़ गई.
इस दुखद घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल कुछ समय के लिए पूरी तरह बदल गया. जहां कुछ देर पहले लोग अपनी समस्याओं की सुनवाई के लिए इंतजार कर रहे थे, वहीं अचानक सन्नाटा पसर गया. प्रशासन ने मामले में जरूरी औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं और घटना के संबंध में आगे की प्रक्रिया की जा रही है.
समस्या लेकर आए, लेकिन शिकायत सुने बिना चले गए
बादल सिंह यादव किस समस्या को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है. हालांकि यह घटना उन लोगों को झकझोर गई, जो अपनी शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे. एक बुजुर्ग अपनी बात कहने के इंतजार में बैठा रहा, लेकिन वक्त ने उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दिया.