चीतों को रास आई कूनो नेशनल पार्क की आबो-हवा, फिर बढ़ा चीतों का कुनबा, सीएम मोहन ने आज फिर छोड़े 2 चीते

Two Female Cheetah Released: कूनो पार्क में छोड़ी गई दोनों चीता मादा है, जो बोत्सवाना से लाई गई हैं. सीएम डॉ. मोहन यादव 11 मई को सुबह लगभग 8 बजे दोनों मादा चीताओं को बाड़े से मुक्त कर प्राकृतिक आवास में भेजा. इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और स्थानीय प्रशासन ने पहले ही तैयारियों का निरीक्षण कर लिया था.

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2 MORE CHEETAH RELEASED BY CM MOHAN YADAV BROUGHT FROM BOTSWANA

Kuno National Park: सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दो और चीतों को बाड़े से कूनो नदी के जंगलों में छोड़ दिया है. दो और नए मेहमानों से अब कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है. पिछले 3 साल में कूनो में कुल 49 शावकों का जन्म हुआ है, जो यह बताती है कि कूनो की आबो-हवा चीतों का पसंद आने लगी है इसका प्रमाण है कि कूनो में लगातार चीतों की संख्या बढ़ रही है. 

कूनो पार्क में छोड़ी गई दोनों चीताएं मादा है, जो बोत्सवाना से फरवरी 2026 लाई गई हैं. सीएम डॉ. मोहन यादव 11 मई को सुबह लगभग 8 बजे दोनों मादा चीताओं को बाड़े से मुक्त कर प्राकृतिक आवास में भेजा. इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और स्थानीय प्रशासन ने पहले ही तैयारियों का निरीक्षण कर लिया था.

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हाल में कूनो में मादा चीता गामिनी ने खुले जंगल में 4 शावकों को जन्म दिया

गौरतलब है प्रोजेक्ट चीता के तहत यह कदम भारत में चीता पुनर्स्थापन अभियान को नई गति देने के लिए उठाया गया है. सरकार अब कूनो को एक ग्लोबल चीता ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. हाल में मादा चीता गामिनी ने खुले जंगल में 4 शावकों को जन्म दिया है और यह पहली बार है जब भारत में जन्मीं किसी मादा ने प्राकृतिक वातावरण में प्रजनन किया, जो प्रोजेक्ट की सफलता का बड़ा प्रमाण है.

बोत्सवाना से लाए मादा चीताओं को कूनो नदी के पास खुले वन क्षेत्र में छोड़ा गया

रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2026 में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से दो मादाओं को क्वारंटीन और अनुकूलन काल पूरा करने के बाद कूनो नदी के पास खुले वन क्षेत्र में मुक्त किया गया. माना जा रहा है कि बोत्सवाना से आए चीते दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के चीतों के साथ मिलकर एक स्वस्थ और टिकाऊ आबादी बनाने में मदद करेंगे.

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कूनो में भीड़-भाड़ रोकने और चीतों को पर्याप्त जगह देने के लिए गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को 'दूसरे घर' के रूप में तैयार किया गया है और नौरादेही अभयारण्य को भविष्य के लिए चुना गया है. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी और भारतीय वन्यजीव संस्थान चीतों की सेहत, शिकार की आदतों व क्षेत्रीय व्यवहार की निरंतर निगरानी करती है.

केवल 'टाइगर स्टेट' नहीं, बल्कि एक 'वाइल्डलाइफ लीडर' बनने की ओर अग्रसर है MP

उल्लेखनीय है सरकार का प्रोजेक्ट और संवर्धन की तैयारी सरकार 'प्रोजेक्ट चीता' को केवल जानवरों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि इसे एक व्यापक इकोसिस्टम बहाली मॉडल के रूप में देख रही है. इस तरह मध्य प्रदेश अब केवल 'टाइगर स्टेट' नहीं बल्कि एक 'वाइल्डलाइफ लीडर' बनने की ओर अग्रसर है.

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