Shahdol News: मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े एक बड़े वित्तीय अनियमितता मामले में शासन ने सख्त कार्रवाई की है. बुढार ब्लॉक में प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के रूप में पदस्थ रहे अशोक कुमार शर्मा को एक करोड़ एक लाख 72 हजार रुपये से अधिक की सरकारी राशि के कथित गबन और दुरुपयोग के मामले में शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. जनजातीय कार्य विभाग द्वारा की गई विभागीय जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए. बताया गया कि उन्होंने प्रभारी BEO रहते हुए विभिन्न मदों की सरकारी राशि और छात्रों की छात्रवृत्ति राशि को नियमों के विपरीत अन्य खातों में ट्रांसफर कर वित्तीय अनियमितताएं की थीं.
प्रभारी BEO रहते हुए लगाया करोड़ों का चूना
जानकारी के अनुसार अशोक कुमार शर्मा मूल रूप से व्याख्याता पद पर पदस्थ थे. वर्ष 2014 में उन्हें बुढार विकासखंड का प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाया गया था. आरोप है कि वर्ष 2014 से 2020 के बीच उन्होंने विभिन्न योजनाओं और सरकारी मदों से प्राप्त राशि को नियमों के विरुद्ध अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर उसका दुरुपयोग किया. जांच में एक करोड़ एक लाख 72 हजार रुपये से अधिक की राशि में अनियमितता और गबन के आरोप सामने आए.
छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग का भी आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि विद्यार्थियों को वितरण के लिए प्राप्त छात्रवृत्ति राशि का भी निर्धारित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया. आरोप है कि छात्रवृत्ति की धनराशि को अन्य खातों में ट्रांसफर कर वित्तीय अनियमितता की गई. इसे विभाग ने गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय कदाचार माना.
Shahdol Embezzlement Case: शहडोल गबन मामला
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पूरे मामले की शिकायत अधिवक्ता प्रदीप सिंह द्वारा कलेक्टर, कमिश्नर और आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग से की गई थी. शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई. प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद अशोक शर्मा को निलंबित किया गया और बुढार थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई.
हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
एफआईआर दर्ज होने के बाद अशोक शर्मा ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. बताया गया कि उन्होंने हाईकोर्ट से एफआईआर को क्वैश करा लिया था. इसके बाद जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर को वैध माना और जांच की प्रक्रिया को सही ठहराया.
विभागीय जांच में आरोप सिद्ध
जनजातीय कार्य विभाग द्वारा की गई विस्तृत विभागीय जांच में अशोक शर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए. जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय दायित्वों का उल्लंघन माना. इसके बाद शासन स्तर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें उनकी मूल सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया.
शासन ने जारी किया बर्खास्तगी आदेश
मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय, भोपाल द्वारा जारी आदेश के तहत अशोक कुमार शर्मा को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी राशि के दुरुपयोग और कदाचार के आरोप सिद्ध होने के बाद की गई है.
विभाग ने दी कार्रवाई की जानकारी
जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर जे.पी. यादव ने बताया कि विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए थे. नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को शासकीय सेवा से पृथक कर दिया गया है.
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