रीवा रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट फेल; महिलाएं‑बच्चे ढाई घंटे फंसे रहे, जबलपुर टीम ने किया रेस्क्यू, हादसा टला

Railway Lift Accident: रीवा रेलवे स्टेशन पर इतवारी ट्रेन की 7 सवारियां लिफ्ट में ढाई से 3 घंटे तक फंसी रहीं, जबलपुर से आई टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू किया. पढ़िए पूरी खबर.

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रीवा स्टेशन पर बड़ा हादसा टला, लिफ्ट में फंसी 7 सवारियां

Rewa Railway Station Lift Accident: रीवा रेलवे स्टेशन पर उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब नागपुर से चलकर रीवा पहुंची इतवारी ट्रेन की सात सवारियां स्टेशन की लिफ्ट में ढाई से तीन घंटे तक फंसी रहीं. लिफ्ट में महिलाओं और बच्चों के फंसे होने की सूचना से स्टेशन पर हड़कंप मच गया. स्थानीय स्तर पर लिफ्ट सुधारने के प्रयास विफल रहे, जिसके बाद जबलपुर मंडल से इंजीनियरों की टीम बुलानी पड़ी. कड़ी मशक्कत के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया. घटना के बाद स्टेशन की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

इत्वारी ट्रेन से उतरते ही फंसी सवारी

घटना उस समय हुई जब नागपुर से चलकर रीवा पहुंची इतवारी ट्रेन से यात्री उतरकर प्लेटफॉर्म से बाहर जा रहे थे. कुछ यात्री स्टेशन पर लगी लिफ्ट की ओर पहुंचे. उस वक्त मौके पर कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था. महिलाओं और बच्चों समेत कुल सात लोग लिफ्ट में सवार हुए और जैसे ही लिफ्ट चली, वह आधे रास्ते में आकर अचानक बंद हो गई.

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लिफ्ट के अंदर मची चीख‑पुकार

लिफ्ट रुकते ही अंदर फंसे यात्रियों में अफरा‑तफरी मच गई. चीख‑पुकार सुनकर स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों की भीड़ इकट्ठा हो गई. धीरे‑धीरे मामला गंभीर होता देख रेलवे प्रशासन को सूचना दी गई.

Rewa Railway Station Lift Accident: रीवा स्टेशन में लिफ्ट फंसने की घटना

स्थानीय प्रयास रहे नाकाम

सूचना मिलते ही रेलवे की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची. स्थानीय स्तर पर लिफ्ट सुधारने के लिए इंजीनियरों ने प्रयास किए, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते कोई सफलता नहीं मिल सकी. यात्रियों को बाहर निकालने के लिए कई घंटे तक कोशिशें चलती रहीं.

जबलपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम

स्थानीय प्रयास विफल होने के बाद मामले की सूचना जबलपुर मंडल को दी गई. इसके बाद सीनियर डीसीएम शशांक गुप्ता के नेतृत्व में इंजीनियरों की एक विशेष टीम रीवा पहुंची. सीनियर इंजीनियरों से ऑनलाइन संपर्क कर तकनीकी समाधान किया गया, जिसके बाद लिफ्ट को धीरे‑धीरे ऊपर लाया गया और अंदर फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

खाने‑पीने और हवा की व्यवस्था

यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए लिफ्ट में एक छोटा होल कर खाने‑पीने की सामग्री अंदर पहुंचाई गई. इसी रास्ते से हवा भी जाती रही, जिससे किसी को सांस लेने में तकलीफ नहीं हुई. रेलवे कर्मियों ने बाहर से लगातार यात्रियों को ढांढस भी बंधाया.

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मेडिकल जांच, फिर आगे का सफर

लिफ्ट से बाहर निकालने के बाद एहतियातन सभी यात्रियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया. मौके पर डॉक्टरों की टीम और एंबुलेंस मौजूद रही. मेडिकल जांच के बाद सभी यात्रियों को उनके गंतव्य के लिए आगे रवाना कर दिया गया. लिफ्ट में फंसे यात्रियों में एक महिला अपने बच्चों के साथ सीधी जाने वाली थी, जबकि अन्य यात्री मऊगंज के बरांव गांव जाने वाले थे.

रेलवे अधिकारी का बयान

सीनियर डीसीएम शशांक गुप्ता ने बताया कि लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण यह स्थिति बनी. पूरे समय सीनियर अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा गया और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही. उन्होंने कहा कि व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है.

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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था और लिफ्ट के रखरखाव को लेकर यात्रियों ने नाराजगी जताई. यात्रियों का कहना है कि बिना सुरक्षा मानकों की जांच के लिफ्ट का संचालन गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. रेलवे प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है.

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