लव मैरिज के बाद परिवार का सामाजिक बहिष्कार! पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार

रतलाम जिले के पंचेवा गांव में प्रेम विवाह करने वाले एक दंपती और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया. गांव की बैठक में दूध, राशन और दैनिक जरूरत की वस्तुएं न देने का फैसला लिया गया और मंदिर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी.

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Love Marriage Social Boycott: रतलाम जिले के ग्राम पंचेवा में प्रेम विवाह करने वाले एक युवा दंपती और उनके पूरे परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है. शादी को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन गांव में हुई एक बैठक के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि परिवार को अब रोजमर्रा की जरूरतों तक से वंचित किया जा रहा है. मजबूर होकर पीड़ित युवक-युवती कलेक्टर के पास पहुंच गए और पूरे मामले में न्याय की मांग की.

प्रेम विवाह के बाद शुरू हुई परेशानी

पीड़ित दंपती के मुताबिक जून 2025 में उन्होंने बालिग होने के बाद अपनी इच्छा से प्रेम विवाह किया था. विवाह के बाद लड़के के परिवार ने इस रिश्ते को बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया और सभी सामान्य तरीके से जीवन जी रहे थे. लेकिन लगभग सात महीने बाद अचानक माहौल बदल गया और गांव में उनके खिलाफ कदम उठाए जाने लगे.

गांव की बैठक में हुआ सामाजिक बहिष्कार का ऐलान

परिवार ने बताया कि 24 जनवरी 2026 की रात पंचेवा गांव के राम मंदिर परिसर में एक बैठक बुलाई गई. आरोप है कि मंदिर के पुजारी ने माइक से लोगों को इकट्ठा किया. वहां मौजूद कुछ प्रभावशाली लोगों की सहमति से पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार घोषित कर दिया. निर्णय लिया कि कोई भी व्यक्ति उन्हें दूध, चाय, राशन या कोई भी जरूरी सामान नहीं बेचेगा. इतना ही नहीं, परिवार के सदस्यों के मंदिर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी.

पूरा परिवार बना निशाना

पीड़ितों के अनुसार, यह बहिष्कार केवल दंपती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे परिवार को समाज से अलग कर दिया गया. खासकर उनके काका निर्मल जाट, जिन्होंने विवाह का समर्थन किया था, उन्हें भी बाजार और सामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर कर दिया गया. इससे परिवार को मानसिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है.

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मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया फैसला

परिवार का कहना है कि पंचायत जैसी बैठकों में इस तरह की घोषणाएं संविधान के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि जब देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, तब ग्रामीण स्तर पर संविधान को ताक पर रखकर लोगों को दंडित किया जा रहा है. यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल  

पीड़ितों ने यह भी बताया कि बहिष्कार संबंधी वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं. इससे उनकी सामाजिक छवि खराब हो रही है और उनकी मानहानि भी हो रही है. परिवार ने प्रशासन से इसकी रोक लगवाने और कार्रवाई करने की मांग की है.

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प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार चाहता है कि प्रशासन गांव में लोगों को समझाए और बहिष्कार की घोषणा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे. उनका कहना है कि ऐसी परंपराएं समाज को पीछे धकेलती हैं और कानून व्यवस्था को कमजोर करती हैं. इसलिए इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप जरूरी है.

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर मिशा सिंह ने पीड़ितों की शिकायत सुनी और संबंधित अधिकारियों को जांच कर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. परिवार को भरोसा दिया गया है कि उनकी सुरक्षा और अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी.

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