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This Article is From Mar 08, 2026

Rang Panchami: बाबा महाकाल का अद्भुत शृंगार, रंग पंचमी पर अर्पित किया गया केसरयुक्त रंग

Rang Panchami 2026: पूजन के बाद बाबा महाकाल को रजत ॐ, बिल्वपत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई. मस्तक पर त्रिपुंड लगाकर त्रिशूल, डमरू और शेषनाग का रजत मुकुट धारण के साथ मुण्डमाल, रुद्राक्ष और सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित कर राजा स्वरूप में श्रृंगार किया.

Rang Panchami: बाबा महाकाल का अद्भुत शृंगार, रंग पंचमी पर अर्पित किया गया केसरयुक्त रंग

Rang Panchami, Mahakal: मध्य प्रदेश के उज्जैन में अन्य पर्व की तरह रंगपंचमी की शुरुआत भी विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से हुई. यहां रविवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को एक लोटा केसरयुक्त जल चढ़ाया. खास बात यह रही कि दो वर्ष पहले हुई आगजनी के कारण भक्त बारीकी से चेक के बाद ही मंदिर में प्रवेश कर सके.

रंग पंचमी पर अर्पित किया हर्बल रंग

बता दें कि उज्जैन में किसी भी पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होती हैं. यही वजह है कि रविवार को रंगपंचमी सुबह चार बजे प्रतिदिन की तरह मंदिर के पट खोलकर पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया. दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर प्रथम घंटा बजाते हुए 'हरि ओम' का जल अर्पित किया. इसके बाद भस्म आरती में बाबा को एक लोटा हर्बल रंग अर्पित किया. यह देख भक्तों ने पूरा बाबा महाकाल के जयकारे  लगाए, जिससे पूरा मंदिर  गूंज उठा.

राजा स्वरूप में श्रृंगार 

पूजन के बाद बाबा महाकाल को रजत ॐ, बिल्वपत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई. मस्तक पर त्रिपुंड लगाकर त्रिशूल, डमरू और शेषनाग का रजत मुकुट धारण के साथ मुण्डमाल, रुद्राक्ष और सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित कर राजा स्वरूप में श्रृंगार किया. इस दौरान भगवान गणेश, माता पार्वती और कार्तिकेय का भी विधि-विधान से पूजन किया गया. इसके बाद भगवान महाकाल को फलों और मिष्ठान का भोग लगाकर कपूर आरती के पश्चात भस्म अर्पित कर भस्म आरती की गई. 

औपचारिक बनी महाकाल की होली

महाकाल मंदिर में पहले भक्त रंग लेकर आते थे और जमकर होली खेलते थे, जिससे ब्रज की होली सा माहौल हो जाते था. लेकिन वर्ष 2024 में धुलेंडी पर गर्भगृह में हुई आगजनी में 14 लोगों के घायल और एक की मौत के बाद व्यवस्था में बदल दी गई. अब भक्त, पंडे-पुजारियों को मंदिर में रंग लाने की अनुमति नहीं है. इसलिए शासकीय पुजारी को केसर रंग और जल मंदिर की कोठार शाखा से उपलब्ध कराया गया.

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